निफ्टेम-कुंडली में ‘अन्वेष–2026’ सम्मेलन, उभरते और सतत स्वस्थ खाद्य प्रणालियों पर वैश्विक मंथन

निफ्टेम-कुंडली में ‘अन्वेष–2026’ सम्मेलन, उभरते और सतत स्वस्थ खाद्य प्रणालियों पर वैश्विक मंथन

राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, कुंडली (निफ्टेम-के), जो खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, 26–28 फरवरी 2026 तक “एडवांस्ड नेक्स्ट जेनरेशन विजन फॉर इमर्जिंग एंड सस्टेनेबल हेल्दी फूड्स (अन्वेष–2026)” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में 25 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे खाद्य प्रणालियों में नवाचार और सततता पर वैश्विक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बताया है।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अनुसार, पिछले चार से पांच वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग 15,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। वर्तमान में भारत के कुल खाद्य उत्पादन का केवल 12–13 प्रतिशत ही प्रसंस्कृत होता है। सरकार का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में इसे 25 प्रतिशत तक बढ़ाना है।

हालांकि यह क्षेत्र अभी भी काफी हद तक असंगठित है, फिर भी पिछले दशक में इसने लगभग 7 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर दर्ज की है। इसी अवधि में प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात दोगुना हुआ है, जो वैश्विक मांग में वृद्धि को दर्शाता है।

प्रौद्योगिकी, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन पर जोर

अधिकारियों ने कहा कि उन्नत खाद्य प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक पैकेजिंग तकनीकों के माध्यम से उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सकती है और बर्बादी कम की जा सकती है। भारत में फसल कटाई के बाद होने वाली हानि का अनुमान लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये वार्षिक है, जिसे आधुनिक प्रसंस्करण और भंडारण प्रणालियों से काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सम्मेलन में “फूड ऐज मेडिसिन” की अवधारणा को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पोषण और स्वास्थ्य को खाद्य प्रणाली के केंद्र में रखा जा सके।

वैश्विक सहभागिता और प्रमुख विषय

कार्यक्रम में सीजीआईएआर, मैकगिल विश्वविद्यालय, वैगेनिंगेन विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान, वोल्कानी संस्थान और क्वींसलैंड विश्वविद्यालय जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। भारतीय वैज्ञानिकों, निर्यातकों, स्टार्टअप्स और नीति-निर्माताओं की भी सक्रिय भागीदारी होगी।

सम्मेलन में डिजिटल अनुपालन, खाद्य सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी, वैकल्पिक प्रोटीन, न्यूट्रास्यूटिकल्स, अपशिष्ट प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल और कृषि-खाद्य उद्यमिता जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। 50 से अधिक प्रदर्शक, जिनमें स्टार्टअप्स, एमएसएमई और पीएमएफएमई लाभार्थी शामिल हैं, अपने नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • निफ्टेम-के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है।
  • वर्तमान में भारत के कुल खाद्य उत्पादन का लगभग 12–13 प्रतिशत ही प्रसंस्कृत होता है।
  • सरकार का लक्ष्य पांच वर्षों में खाद्य प्रसंस्करण स्तर को 25 प्रतिशत तक बढ़ाना है।
  • भारत में फसल कटाई के बाद की हानि लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये प्रतिवर्ष आंकी गई है।

अन्वेष–2026 सम्मेलन शोध, उद्योग और नीति के बीच सेतु का कार्य करेगा। सतत और लचीली खाद्य प्रणालियों के निर्माण, मूल्य संवर्धन और तकनीकी नवाचार के माध्यम से यह पहल भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकती है।

Originally written on February 27, 2026 and last modified on February 27, 2026.

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