नासा के जूनो मिशन से खुलासा: पहले से अधिक चपटा और छोटा है बृहस्पति ग्रह
बृहस्पति (Jupiter) — सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह — अब पहले से थोड़ा छोटा और अधिक चपटा पाया गया है। यह निष्कर्ष नासा के जूनो मिशन से प्राप्त उन्नत रेडियो विज्ञान आंकड़ों पर आधारित है, जो अब तक बृहस्पति के आकार और संरचना की सबसे सटीक माप प्रदान करता है। इस नई जानकारी से वैज्ञानिकों को बृहस्पति की आंतरिक बनावट और निर्माण इतिहास को बेहतर समझने में सहायता मिली है।
बृहस्पति के आकार की सटीक माप
जूनो मिशन से मिले डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने बृहस्पति का:
- भूमध्यरेखीय व्यास (Equatorial Diameter) 88,841 मील (142,976 किमी) मापा है — यह 1970 के दशक में वॉयजर और पायनियर मिशनों से मिली माप से लगभग 5 मील कम है।
- ध्रुवीय व्यास (Polar Diameter) 83,067 मील (133,684 किमी) पाया गया — जो पूर्व अनुमानों से लगभग 15 मील कम है।
ध्रुवों पर अधिक चपटी संरचना
इस नए विश्लेषण से पुष्टि होती है कि बृहस्पति पहले से अधिक चपटा (oblate) है।
- ग्रह ध्रुवों की तुलना में भूमध्य रेखा पर लगभग 7% चौड़ा है।
- इसकी तुलना में, पृथ्वी केवल 0.33% अधिक चौड़ी है।
- इस असमानता का कारण है बृहस्पति की तेज घूर्णन गति और तरल गैसीय संरचना, जिससे इसका द्रव्यमान भूमध्यरेखीय दिशा में फैल जाता है।
जूनो मिशन ने कैसे संभव किया यह मापन?
नासा के अनुसार, जब जूनो यान पृथ्वी की तुलना में बृहस्पति के पीछे गया, तब उसका रेडियो सिग्नल बृहस्पति के वायुमंडल से होकर गुज़रा।
- इन रेडियो सिग्नलों में आए परिवर्तन से वैज्ञानिकों को ग्रह के वायुमंडलीय घनत्व और तापमान की जानकारी मिली।
- इससे ग्रह के आकार और संरचना की अभूतपूर्व सटीकता से गणना संभव हुई।
- यह अवलोकन नासा द्वारा 2021 में जूनो मिशन के विस्तार के बाद किए गए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बृहस्पति सौरमंडल का पांचवां ग्रह है और आकार में सबसे बड़ा है।
- जूनो मिशन 2016 से बृहस्पति की कक्षा में सक्रिय है।
- बृहस्पति मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम से बना है।
- इसकी तेज़ घूर्णन गति के कारण यह भूमध्य रेखा पर फूला हुआ (equatorial bulging) है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्यों महत्वपूर्ण है बृहस्पति का आकार?
- बृहस्पति के सटीक व्यास की माप से वैज्ञानिकों को इसकी आंतरिक परतों और वायुमंडल के मॉडलों को सुधारने में मदद मिलती है।
- यह ग्रह सौरमंडल के विकास में केंद्रीय भूमिका निभा चुका है।
- ऐसा माना जाता है कि बृहस्पति ने ही पृथ्वी तक जल, अमोनिया जैसे यौगिक पहुँचाने में योगदान दिया, और सौरमंडल की सामग्री के वितरण को प्रभावित किया।
जूनो मिशन की ये नवीनतम खोजें न केवल बृहस्पति ग्रह को बेहतर समझने में सहायक हैं, बल्कि वे सौरमंडल के विकास से जुड़े वैज्ञानिक सिद्धांतों को और सटीकता प्रदान करती हैं।