नासा का SWOT मिशन: महासागर की गहराइयों का नया नक्शा
नासा ने हाल ही में SWOT (Surface Water and Ocean Topography) सैटेलाइट के डेटा का उपयोग कर समुद्र तल का एक विस्तृत मानचित्र तैयार किया है। यह उपलब्धि महासागरों की गहराइयों और वैश्विक जल प्रणाली को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे जलवायु परिवर्तन, समुद्री पारिस्थितिकी और जल संसाधनों के अध्ययन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
SWOT सैटेलाइट मिशन का परिचय
SWOT सैटेलाइट 2022 में लॉन्च किया गया था और यह नासा तथा फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES का संयुक्त मिशन है। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के जल निकायों—जैसे महासागर, नदियां, झीलें और जलाशयों—में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी करना है। यह मिशन वैश्विक स्तर पर जल वितरण और प्रवाह को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएं
SWOT सैटेलाइट में Ka-बैंड रडार इंटरफेरोमीटर (KaRIn) नामक उन्नत उपकरण लगा है, जो जल सतह की ऊंचाई, चौड़ाई और प्रवाह को मापता है। यह माइक्रोवेव सिग्नल भेजकर और उनके वापस आने के समय का विश्लेषण कर सटीक आंकड़े प्राप्त करता है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक जल निकायों में सूक्ष्म बदलावों को भी पहचान सकते हैं, जो पहले संभव नहीं था।
वैश्विक कवरेज और निगरानी क्षमता
यह सैटेलाइट हर 21 दिनों में पृथ्वी की लगभग 90 प्रतिशत सतह को स्कैन कर सकता है। यह 330 फीट से अधिक चौड़ी लगभग सभी नदियों और 5 एकड़ से बड़े एक मिलियन से अधिक झीलों व जलाशयों का अध्ययन करने में सक्षम है। इसके अलावा, यह वैश्विक स्तर पर बड़े बाढ़ घटनाओं के आधे से अधिक हिस्से को उनके पूरे जीवनचक्र के दौरान ट्रैक कर सकता है, जिससे आपदा प्रबंधन में भी मदद मिलती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- SWOT का पूर्ण रूप Surface Water and Ocean Topography है।
- यह नासा और CNES का संयुक्त मिशन है, जिसे 2022 में लॉन्च किया गया।
- KaRIn उपकरण रडार तकनीक से जल सतह की ऊंचाई मापता है।
- यह सैटेलाइट महासागरीय धाराओं, बाढ़ और जल वितरण के अध्ययन में सहायक है।
जलवायु और समुद्री अध्ययन में महत्व
SWOT सैटेलाइट महासागर की सतह में सूक्ष्म परिवर्तनों को पहचानकर छोटी समुद्री धाराओं और भंवरों (eddies) का अध्ययन करने में मदद करता है। ये प्रक्रियाएं वातावरण से गर्मी और कार्बन को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। समुद्र तल का नया मानचित्र वैज्ञानिकों को समुद्री संरचनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा, जिससे जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता पर शोध को बढ़ावा मिलेगा।
अंततः, SWOT मिशन न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को सशक्त बना रहा है, बल्कि यह पृथ्वी के जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।