नासा का आर्टेमिस-II मिशन: पाँच दशक बाद चंद्रमा के पास मानव मिशन
नासा ने घोषणा की है कि उसका आर्टेमिस-II मिशन, जो पाँच दशक से अधिक समय बाद चंद्रमा के पास जाने वाला पहला मानव मिशन होगा, 1 अप्रैल 2026 से लॉन्च के लिए निर्धारित है। यह मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है क्योंकि इसके माध्यम से अंतरिक्ष यात्री एक बार फिर पृथ्वी की निचली कक्षा से आगे गहरे अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे। आर्टेमिस-II को मुख्य रूप से एक परीक्षण उड़ान के रूप में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य भविष्य में होने वाले चंद्रमा पर मानव लैंडिंग मिशनों से पहले अंतरिक्ष यान की प्रणालियों और क्रू संचालन की क्षमता को परखना है।
मिशन का उद्देश्य और उड़ान प्रोफाइल
आर्टेमिस-II मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन अंतरिक्ष यान में सवार होकर स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। प्रक्षेपण के बाद अंतरिक्ष यान पहले पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाएगा और फिर चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेगा। यह मिशन चंद्रमा की परिक्रमा करेगा लेकिन वहां उतरने की योजना नहीं है। चंद्रमा के पास से उड़ान भरने के बाद अंतरिक्ष यान पृथ्वी की ओर लौटेगा और समुद्र में स्प्लैशडाउन के माध्यम से सुरक्षित उतरने की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस मिशन के जरिए मानव को 1970 के दशक में अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार चंद्रमा के इतने करीब ले जाया जाएगा।
आर्टेमिस-II मिशन के अंतरिक्ष यात्री
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक माने जा रहे हैं। मिशन दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं। इनके साथ कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़े अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन भी इस मिशन का हिस्सा होंगे। इस उड़ान के दौरान जीवन-समर्थन प्रणाली, नेविगेशन तकनीक और गहरे अंतरिक्ष में संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य के चंद्र अभियानों को सुरक्षित और सफल बनाया जा सके।
लॉन्च समय में बदलाव के कारण
आर्टेमिस-II मिशन को पहले 2026 की शुरुआत में लॉन्च करने की योजना थी, लेकिन कुछ तकनीकी सुधारों और अतिरिक्त परीक्षणों के कारण इसकी समय-सीमा में बदलाव किया गया। नासा के अधिकारियों के अनुसार इस मिशन में उपयोग किए जा रहे हार्डवेयर और प्रणालियां अत्याधुनिक और जटिल हैं, इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले उनका व्यापक परीक्षण आवश्यक है। नासा ने 1 अप्रैल से शुरू होने वाली छह दिन की अवधि में कई संभावित लॉन्च अवसर भी चिन्हित किए हैं।
भविष्य की योजनाएँ और चंद्र अन्वेषण
आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चंद्रमा तक पहुंचना नहीं बल्कि वहां दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना है। आर्टेमिस-II के बाद आर्टेमिस-III मिशन के तहत चंद्रमा की सतह पर मानव को उतारने की योजना बनाई जा रही है। इसके बाद के अभियानों में लूनर गेटवे नामक अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण और चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक अनुसंधान का विस्तार शामिल है। इन मिशनों को भविष्य में मंगल ग्रह की मानव यात्रा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य अपोलो मिशनों के बाद मानव को फिर से चंद्रमा तक पहुंचाना है।
- आर्टेमिस-II, 1972 में अपोलो-17 के बाद चंद्रमा के पास जाने वाला पहला मानव मिशन होगा।
- इस मिशन में स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान का उपयोग किया जाएगा।
- कनाडा इस मिशन में जेरेमी हैनसेन नामक अंतरिक्ष यात्री के माध्यम से भाग ले रहा है।
समग्र रूप से आर्टेमिस-II मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत का संकेत देता है। यह मिशन न केवल तकनीकी परीक्षण का महत्वपूर्ण चरण है बल्कि भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति और मंगल ग्रह की संभावित यात्रा के लिए भी आधार तैयार करेगा।