नाटो का ‘आर्कटिक सेंट्री’: हाई नॉर्थ में सामरिक समन्वय की नई पहल

नाटो का ‘आर्कटिक सेंट्री’: हाई नॉर्थ में सामरिक समन्वय की नई पहल

उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच North Atlantic Treaty Organization ने ‘आर्कटिक सेंट्री’ नामक नई सैन्य समन्वय पहल की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों से गठबंधन के भीतर तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इस पहल का उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में नाटो की एकजुटता को मजबूत करना और रूस तथा चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।

आर्कटिक सैन्य समन्वय का ढांचा

‘आर्कटिक सेंट्री’ कोई स्थायी नई सैन्य टुकड़ी नहीं है, बल्कि आर्कटिक में पहले से संचालित राष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों को एक साझा ढांचे के अंतर्गत समन्वित करने की पहल है। इसके तहत डेनमार्क का ‘आर्कटिक एंड्योरेंस’ और नॉर्वे का ‘कोल्ड रिस्पॉन्स’ जैसे अभ्यास एकीकृत रूप से संचालित किए जाएंगे।

इस समन्वय का संचालन नाटो के ज्वाइंट फोर्स कमांड, नॉरफॉक (वर्जीनिया) द्वारा किया जाएगा। इसका लक्ष्य सदस्य देशों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) को बढ़ाना, परिस्थितिजन्य जागरूकता को सुदृढ़ करना और कठोर जलवायु परिस्थितियों वाले क्षेत्र में सामूहिक संकल्प का संदेश देना है।

हाई नॉर्थ में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ पिघलने से नए समुद्री मार्ग और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच संभव हो रही है। यही कारण है कि यह क्षेत्र वैश्विक शक्तियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। नाटो के सात सदस्य देशों की सीमाएं आर्कटिक सर्कल के भीतर आती हैं, जिससे यह क्षेत्र सामूहिक रक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

रूस ने अपने आर्कटिक तट पर व्यापक सैन्य उपस्थिति स्थापित कर रखी है, जिसमें हवाई अड्डे और नौसैनिक अड्डे शामिल हैं। चीन ने स्वयं को ‘नियर-आर्कटिक स्टेट’ के रूप में वर्णित करते हुए आर्थिक और वैज्ञानिक गतिविधियां बढ़ाई हैं। ऐसे परिदृश्य में नाटो का मानना है कि ‘आर्कटिक सेंट्री’ सदस्य देशों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

ग्रीनलैंड विवाद और गठबंधन की एकजुटता

ग्रीनलैंड, जो Greenland का स्वायत्त क्षेत्र है और Denmark के अधीन आता है, हाल के कूटनीतिक विवादों का केंद्र रहा। इस घटनाक्रम ने 32 सदस्यीय नाटो गठबंधन के भीतर एकजुटता को लेकर प्रश्न खड़े किए।

‘आर्कटिक सेंट्री’ को आंतरिक मतभेदों से ध्यान हटाकर साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं पर केंद्रित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यूरोपीय देशों ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि यूक्रेन को समर्थन और पूर्वी सीमा की सुरक्षा के बीच गठबंधन की एकता बनाए रखना आवश्यक है।

भविष्य की संभावनाएं और विस्तार

यूनाइटेड किंगडम ने नॉर्वे में अपनी सैन्य तैनाती को अगले तीन वर्षों में 1,000 से बढ़ाकर 2,000 सैनिक करने की घोषणा की है। फ्रांस और जर्मनी ने भी भागीदारी का संकेत दिया है, हालांकि सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है। फिलहाल ‘आर्कटिक सेंट्री’ समन्वय तंत्र के रूप में कार्य करेगा, लेकिन भविष्य में सुरक्षा आकलन के अनुसार इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नाटो की स्थापना 1949 में हुई थी और वर्तमान में इसके 32 सदस्य देश हैं।
  • नाटो के सात सदस्य देशों की सीमाएं आर्कटिक क्षेत्र में आती हैं।
  • ग्रीनलैंड, डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक में नए समुद्री मार्ग और संसाधनों तक पहुंच संभव हो रही है।

समग्र रूप से, ‘आर्कटिक सेंट्री’ पहल हाई नॉर्थ में नाटो की सामूहिक रक्षा रणनीति को संरचित और समन्वित रूप देने का प्रयास है। यह पहल बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलित निरोधक क्षमता और गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Originally written on February 12, 2026 and last modified on February 12, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *