नागालैंड विश्वविद्यालय में आईसीसीएमआर–2026 के दौरान पांच वैज्ञानिकों को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान

नागालैंड विश्वविद्यालय में आईसीसीएमआर–2026 के दौरान पांच वैज्ञानिकों को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान

नागालैंड विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन केमिस्ट्री इन मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च (आईसीसीएमआर–2026)” के उद्घाटन सत्र में पांच प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किए। यह तीन दिवसीय सम्मेलन 18 से 20 फरवरी तक लुमामी स्थित आई इहोशे किनिमी हॉल में आयोजित हुआ, जिसमें देश-विदेश के प्रमुख वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर रासायनिक विज्ञान और उससे संबद्ध क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विद्वानों को सम्मानित किया गया।

सम्मानित वैज्ञानिक और उनके योगदान

इस वर्ष सम्मान पाने वालों में प्रो. ए. के. मल्लिक, प्रो. वी. एस. राजा, प्रो. एम. ए. कुरैशी, प्रो. एम. इंदिरा देवी और प्रो. नितिन चट्टोपाध्याय शामिल हैं। प्रो. मल्लिक, जो पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला से जुड़े रहे हैं, ने मटेरियल्स केमिस्ट्री, नैनोप्रौद्योगिकी और सतह विज्ञान में महत्वपूर्ण शोध किया है। उनके द्वारा विकसित नैनोमटेरियल्स और इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर ऊर्जा भंडारण तथा पर्यावरणीय निगरानी में उपयोगी सिद्ध हुए हैं।

प्रो. वी. एस. राजा, आईआईटी बॉम्बे के वरिष्ठ वैज्ञानिक, जंग (कोरोजन) विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं। उनके शोध ने औद्योगिक क्षेत्रों में जंग के तंत्र और उससे बचाव की रणनीतियों को समझने में नई दिशा दी है।

कोरोजन और ग्रीन केमिस्ट्री में वैश्विक पहचान

प्रो. एम. ए. कुरैशी, जो आईआईटी-बीएचयू वाराणसी से संबद्ध रहे हैं, को कोरोजन विज्ञान और ग्रीन केमिस्ट्री का वैश्विक विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल जंग अवरोधकों का विकास किया है और 380 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, जिन्हें 15,000 से अधिक बार उद्धृत किया जा चुका है। उनका कार्य औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रो. एम. इंदिरा देवी, नागालैंड विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर, भौतिक रसायन विज्ञान में विशेष रूप से लैंथेनाइड कॉम्प्लेक्सेशन और नैनोमटेरियल्स पर कार्य करती रही हैं। उन्होंने विज्ञान संकाय की डीन के रूप में भी संस्थागत विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

फोटोकेमिस्ट्री और बहुविषयक अनुसंधान

प्रो. नितिन चट्टोपाध्याय, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता के पूर्व प्रोफेसर एवं डीन, फोटोफिजिक्स, फोटोकेमिस्ट्री और फ्लोरोसेंस सेंसिंग में अपने शोध के लिए प्रसिद्ध हैं। वे वर्तमान में सीएसआईआर के एमेरिटस वैज्ञानिक के रूप में सक्रिय हैं। उनके कार्य ने जैविक और औद्योगिक विश्लेषण में नई संभावनाएं खोली हैं।

आईसीसीएमआर–2026 सम्मेलन ने रसायन विज्ञान की बहुविषयक भूमिका पर विशेष जोर दिया। इसमें मटेरियल साइंस, पर्यावरणीय स्थिरता और औद्योगिक अनुप्रयोगों से जुड़े शोध विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस आयोजन ने पूर्वोत्तर भारत में वैज्ञानिक सहयोग और अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* आईसीसीएमआर–2026 का विषय रसायन विज्ञान और बहुविषयक अनुसंधान पर केंद्रित था।
* कोरोजन विज्ञान औद्योगिक सुरक्षा और आधारभूत संरचनाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।
* ग्रीन केमिस्ट्री पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ रासायनिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देती है।
* लैंथेनाइड दुर्लभ मृदा तत्व हैं, जिनका उपयोग उन्नत सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स में व्यापक रूप से होता है।

इन सम्मानों के माध्यम से नागालैंड विश्वविद्यालय ने शोध उत्कृष्टता और अकादमिक नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। यह पहल दर्शाती है कि पूर्वोत्तर भारत के शैक्षणिक संस्थान भी नवाचार और उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

Originally written on February 23, 2026 and last modified on February 23, 2026.

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