नागालैंड में मिली नई वनस्पति प्रजाति “Hoya nagaensis”: जैव विविधता संरक्षण में सामुदायिक वनों की भूमिका
नागालैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने हाल ही में राज्य के ऊंचाई वाले वनों में एक नई वनस्पति प्रजाति की खोज की है, जिसे “Hoya nagaensis” नाम दिया गया है। यह खोज न केवल पूर्वोत्तर भारत की जैव विविधता को प्रमाणित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार सामुदायिक रूप से संरक्षित वन दुर्लभ और अनदेखी वनस्पतियों के संरक्षण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
सामुदायिक रूप से संरक्षित वनों में खोज
“Hoya nagaensis” की खोज नागालैंड के फेक ज़िले के कावुनहो सामुदायिक आरक्षित वन क्षेत्र में की गई, जो वैज्ञानिक रूप से अभी तक अपेक्षाकृत कम अन्वेषित रहा है। नागालैंड की विशेषता यह है कि राज्य के अधिकांश वन राज्य के स्वामित्व के बजाय स्थानीय समुदायों द्वारा स्वशासित और संरक्षित हैं। पारंपरिक सामुदायिक संरचना ने भले ही जंगलों को बचाकर रखा हो, लेकिन वैज्ञानिक सर्वेक्षण की कमी के कारण यहाँ की जैव विविधता का एक बड़ा भाग अभी भी दस्तावेजीकृत नहीं है।
वैज्ञानिक अध्ययन और वर्गीकरण की प्रक्रिया
इस अनुसंधान का नेतृत्व नागालैंड विश्वविद्यालय के वानिकी विभाग के ज्ञाति याम ने किया, जिसमें विएनाइट-ओ कोज़ा और जयनाथ पेगु भी शामिल थे। टीम ने गहन क्षेत्रीय कार्य, प्रत्यक्ष अवलोकन, नमूना संग्रहण और ज्ञात प्रजातियों के साथ तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से नई प्रजाति की पहचान की। यह अध्ययन विश्वविद्यालय की यंग फैकल्टी स्टार्ट-अप परियोजना द्वारा समर्थित था और इसे “Kew Bulletin” में प्रकाशित किया गया—जो कि वनस्पति वर्गीकरण और जैव विविधता पर एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल है।
विशिष्ट गुण और संरक्षण स्थिति
शोधकर्ताओं के अनुसार “Hoya nagaensis” में अनोखे पत्ती आकार और पुष्प लक्षण हैं, जो इसे “Hoya” वंश की अन्य प्रजातियों से अलग बनाते हैं। यह वंश आमतौर पर सजावटी और मोम जैसी फूलों वाली पौधियों के लिए जाना जाता है। यह प्रजाति वर्तमान में केवल एक सीमित क्षेत्र में पाई गई है, और इसके निवास स्थल पर स्थानांतरण खेती एवं वन क्षरण जैसी गतिविधियों से खतरा बना हुआ है। इस कारण इसे अस्थायी रूप से “अत्यंत संकटग्रस्त” (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नागालैंड में उच्च प्रतिशत में सामुदायिक रूप से प्रबंधित वन हैं।
- “Hoya” वंश सजावटी और मोम जैसे पुष्पों के लिए प्रसिद्ध है।
- “Kew Bulletin” वनस्पति वर्गीकरण पर आधारित एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल है।
- “Critically Endangered” संरक्षण की सबसे गंभीर श्रेणी है, जो विलुप्ति से ठीक पहले आती है।
जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्व
नागालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीश कुमार पटनायक ने इस खोज को सामुदायिक वनों की पारिस्थितिकीय महत्ता का स्मरण बताया। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह खोज केवल एक प्रजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वी हिमालय की समशीतोष्ण वनों को अविज्ञात वनस्पति विविधता के भंडार के रूप में उजागर करती है। इसके साथ-साथ यह यह भी सिद्ध करती है कि पारंपरिक आदिवासी वन प्रबंधन प्रणाली नाज़ुक पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा में प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।
यह खोज न केवल वनस्पति विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान है, बल्कि यह भारत की जैव विविधता नीति और संरक्षण रणनीति को भी और अधिक समावेशी और सामुदायिक रूप से प्रेरित बनाने की प्रेरणा देती है।