नागपुर में बनेगा देश का सबसे बड़ा वेस्ट-टू-बायोगैस प्लांट
नागपुर जल्द ही एक राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। शहर के भांडेवाड़ी क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (Municipal Solid Waste) से संपीड़ित बायोगैस (CBG) बनाने वाला संयंत्र तैयार हो रहा है। यह संयंत्र ड्राई एनएरोबिक डाइजेशन (Dry Anaerobic Digestion) तकनीक पर आधारित है और इसके मार्च 2026 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। यह परियोजना शहरी कचरा प्रबंधन में एक परिवर्तनकारी कदम साबित होने जा रही है।
भांडेवाड़ी परियोजना की प्रगति
करीब 30 एकड़ नगरपालिका भूमि पर फैले इस संयंत्र का कोल्ड कमीशनिंग (Cold Commissioning) चरण पूरा हो चुका है। हालांकि लंबी मानसूनी अवधि के कारण निर्माण कार्य में कुछ विलंब हुआ, लेकिन प्रशासन ने परियोजना को चार महीने का विस्तार दिया है, जिससे अब हॉट कमीशनिंग चरण जल्द शुरू किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग तथा सख्त प्रशासनिक निगरानी में यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
तकनीक और क्षमता की विशेषताएँ
संयंत्र की कुल प्रसंस्करण क्षमता 1,500 मीट्रिक टन प्रति दिन (MTPD) रखी गई है, जो अनिवार्य 1,000 MTPD से अधिक है, ताकि भविष्य में बढ़ते कचरे को भी संभाला जा सके। इसमें प्रयुक्त ड्राई फर्मेंटेशन तकनीक को 2024 में किए गए ऑन-साइट पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से परखा गया था। यह तकनीक भारत की मिश्रित कचरा संरचना के अनुरूप है और कम ऊर्जा में उच्च गुणवत्ता वाला बायोगैस उत्पादन सुनिश्चित करती है। इस पैमाने पर यह संयंत्र न केवल भारत का पहला है, बल्कि विश्व के सबसे बड़े ड्राई एनएरोबिक डाइजेशन प्लांट्स में से एक माना जाएगा।
पर्यावरणीय और परिचालन लाभ
ड्राई एनएरोबिक डाइजेशन तकनीक में ऊर्जा की खपत कम होती है, जबकि उच्च मात्रा में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पन्न होती है। परियोजना से प्रतिदिन लगभग 600 टन जैविक कचरा बायोगैस में परिवर्तित किया जाएगा। साथ ही यह संयंत्र Refuse-Derived Fuel (RDF) का उत्पादन करेगा और निष्क्रिय (Inert) सामग्री को 10% से कम तक सीमित रखेगा। स्वचालित संचालन प्रणाली और कठोर इंजीनियरिंग मानकों से संयंत्र की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यह भारत का पहला बड़े पैमाने का ड्राई एनएरोबिक डाइजेशन संयंत्र है।
- कुल निर्मित क्षमता 1,500 MTPD है, जबकि निर्धारित क्षमता 1,000 MTPD थी।
- कोल्ड कमीशनिंग पूर्ण, पूर्ण संचालन मार्च 2026 तक प्रस्तावित।
- यह परियोजना ज़ीरो-टिपिंग-फी और ज़ीरो-डिस्चार्ज मॉडल पर आधारित है।
वित्तीय मॉडल और शहरी प्रभाव
यह परियोजना पूरी तरह निजी निवेश से विकसित की जा रही है, जिससे नगर निगम पर किसी प्रकार का प्रसंस्करण शुल्क (Processing Cost) नहीं आएगा। उल्टे, नगर निकाय को इससे रॉयल्टी आय प्राप्त होगी। यह संयंत्र नागपुर के समूचे दैनिक कचरे को संसाधित करने में सक्षम होगा, जिससे भांडेवाड़ी क्षेत्र का कायाकल्प होगा और यह मॉडल अन्य शहरी केंद्रों के लिए प्रेरक उदाहरण बनेगा कि कैसे कचरे को ऊर्जा और सतत विकास के अवसर में बदला जा सकता है।