नवरोज़ पर्व: पारसी नववर्ष और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरोज़ के अवसर पर देशवासियों, विशेषकर पारसी समुदाय को शुभकामनाएं दीं और इसके सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। नवरोज़, जिसे पारसी नववर्ष के रूप में मनाया जाता है, नई शुरुआत, समृद्धि और सद्भाव का प्रतीक है। यह पर्व न केवल भारत में बल्कि विश्व के कई हिस्सों में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
नवरोज़ का अर्थ और महत्व
नवरोज़, जिसे ‘नौरोज’ या ‘नौरूज़’ भी कहा जाता है, फारसी मूल का एक पारंपरिक नववर्ष है। ‘नव’ का अर्थ ‘नया’ और ‘रोज़’ का अर्थ ‘दिन’ होता है, यानी ‘नया दिन’। यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है और प्रकृति में नवजीवन, पुनर्जन्म तथा प्रकाश की अंधकार पर विजय का प्रतीक है। इस दिन लोग विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, घरों को सजाते हैं और सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नवरोज़ की उत्पत्ति प्राचीन फारसी साम्राज्य से जुड़ी हुई है और यह जोरोएस्ट्रियन (जरथुस्त्र) कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण पर्व रहा है। इसे अत्यंत पवित्र माना जाता था और इसका संबंध प्रसिद्ध फारसी राजा जमशेद से जोड़ा जाता है, जिन्होंने शाहंशाही कैलेंडर की स्थापना की थी। समय के साथ यह पर्व विभिन्न क्षेत्रों में फैल गया और एक वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव बन गया।
भारत में नवरोज़ का उत्सव
भारत में नवरोज़ का प्रचलन पारसी समुदाय के माध्यम से हुआ, जो फारस से यहां आकर बसे। विशेष रूप से 18वीं शताब्दी में सूरत के व्यापारी नुसेरवानजी कोह्याजी के योगदान से यह परंपरा मजबूत हुई। आज पारसी समुदाय इस दिन अग्नि मंदिरों में प्रार्थना करता है, पारंपरिक व्यंजन बनाता है और दान-पुण्य के कार्य करता है। यह पर्व उनकी सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत का प्रतीक है।
वैश्विक और सांस्कृतिक महत्व
नवरोज़ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और साझा विरासत का प्रतीक भी है। यह ईरान, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कई देशों में मनाया जाता है। इसकी वैश्विक मान्यता को देखते हुए इसे यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी मान्यता दी गई है। भारत में यह पर्व विविधता में एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नवरोज़ फारसी नववर्ष है और वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है।
- ‘नवरोज़’ शब्द का अर्थ ‘नया दिन’ होता है।
- यह जोरोएस्ट्रियन कैलेंडर से जुड़ा हुआ है और राजा जमशेद से संबंधित माना जाता है।
- नवरोज़ को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया है।
नवरोज़ का पर्व हमें नई शुरुआत, सकारात्मकता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देता है। यह न केवल पारसी समुदाय की पहचान है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का भी सुंदर उदाहरण है।