नमो ड्रोन दीदी योजना से महिलाओं को तकनीकी सशक्तिकरण
कर्नाटक ने नमो ड्रोन दीदी योजना (NDDY) के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित करने में अग्रणी राज्य के रूप में उभरकर एक नई मिसाल पेश की है। यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देती है। इससे न केवल ग्रामीण आजीविका मजबूत हो रही है, बल्कि प्रिसिजन फार्मिंग को भी बढ़ावा मिल रहा है।
नमो ड्रोन दीदी योजना का परिचय
नमो ड्रोन दीदी योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाना है। इस योजना के माध्यम से ड्रोन तकनीक को कृषि में शामिल किया जा रहा है, जिससे SHGs किसानों को किराये पर सेवाएं प्रदान कर सकें। इन सेवाओं में मुख्य रूप से तरल उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव शामिल है, जिससे श्रम की बचत और कार्य की दक्षता बढ़ती है।
उद्देश्य और लक्ष्य
इस योजना के तहत 2024–25 और 2025–26 के दौरान 15,000 ड्रोन महिला SHGs को वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी कौशल प्रदान कर उनकी आय के स्रोतों को बढ़ाना और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल और तकनीकी समावेशन को भी बढ़ावा देती है।
वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण व्यवस्था
सरकार इस योजना के अंतर्गत ड्रोन की लागत का 80% तक अनुदान देती है, जो अधिकतम 8 लाख रुपये तक सीमित है। शेष 20% राशि के लिए SHGs कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) के तहत 3% ब्याज छूट के साथ ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, प्रत्येक समूह से एक सदस्य को 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें ड्रोन संचालन, पायलट प्रमाणन और कृषि उपयोग से संबंधित तकनीकी जानकारी शामिल होती है।
कार्यान्वयन और संस्थागत ढांचा
इस योजना का कार्यान्वयन विभिन्न विभागों के समन्वय से किया जा रहा है, जिनमें कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और उर्वरक विभाग के साथ-साथ प्रमुख उर्वरक कंपनियां शामिल हैं। यह समन्वित प्रयास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक पहुंच को सुनिश्चित करता है, जिससे महिलाओं की भूमिका आधुनिक कृषि में और अधिक सशक्त हो रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नमो ड्रोन दीदी योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो महिला SHGs पर केंद्रित है।
- योजना के तहत 2024–25 और 2025–26 में 15,000 ड्रोन वितरित करने का लक्ष्य है।
- सरकार ड्रोन लागत का 80% तक अनुदान (अधिकतम ₹8 लाख) प्रदान करती है।
- प्रशिक्षण में ड्रोन संचालन और कृषि छिड़काव तकनीक शामिल होती है।
यह योजना ग्रामीण भारत में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि देश की कृषि प्रणाली भी अधिक आधुनिक और उत्पादक बनेगी।