नई टीवी रेटिंग नीति से पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ावा
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने हाल ही में एक नई टेलीविजन रेटिंग नीति अधिसूचित की है, जिसका उद्देश्य दर्शक मापन प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्वतंत्रता को मजबूत करना है। यह नीति पुराने 2014 दिशानिर्देशों की जगह लेती है और इसमें संरचनात्मक सुधार, डेटा संग्रह के विस्तार तथा सख्त ऑडिट व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। इस पहल का लक्ष्य एक निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी प्रसारण वातावरण तैयार करना है, जिससे दर्शकों, विज्ञापनदाताओं और प्रसारकों सभी को लाभ मिले।
पात्रता और शासन में प्रमुख बदलाव
नई नीति के तहत टीवी रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेट वर्थ की आवश्यकता को ₹20 करोड़ से घटाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। इससे इस क्षेत्र में अधिक कंपनियों की भागीदारी संभव होगी। साथ ही, एजेंसियों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि उनके निदेशक मंडल का कम से कम 50% हिस्सा स्वतंत्र निदेशकों का हो, जिनका प्रसारकों या विज्ञापन एजेंसियों से कोई संबंध न हो। इसके अलावा, रेटिंग एजेंसियों को परामर्श सेवाएं देने से भी रोका गया है, ताकि हितों के टकराव की संभावना समाप्त हो सके।
मापन प्रणाली का विस्तार
दर्शक आंकड़ों की सटीकता बढ़ाने के लिए नीति में मापन ढांचे के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। एजेंसियों को 18 महीनों के भीतर मीटर लगे घरों की संख्या बढ़ाकर 80,000 करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसे आगे चलकर 1.2 लाख तक बढ़ाया जाएगा। मौजूदा एजेंसियों को प्रारंभिक लक्ष्य छह महीनों के भीतर पूरा करना होगा। इसके तहत घरों में मौजूद सभी टीवी स्क्रीन को डेटा संग्रह में शामिल किया जाएगा, जिससे अधिक व्यापक और प्रतिनिधिक आंकड़े प्राप्त होंगे।
पारदर्शिता, डेटा प्रकटीकरण और ऑडिट
नई नीति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एजेंसियों को अपनी कार्यप्रणाली और अनाम (अनोनिमाइज्ड) डेटा को सार्वजनिक रूप से अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा, एक दोहरी ऑडिट प्रणाली लागू की गई है, जिसमें त्रैमासिक आंतरिक ऑडिट और वार्षिक बाहरी ऑडिट शामिल हैं। सरकार भी एक विशेष ऑडिट और निगरानी टीम गठित करेगी, जो समय-समय पर निरीक्षण करेगी। साथ ही, डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 का पालन अनिवार्य किया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टीवी रेटिंग एजेंसियों के लिए नेट वर्थ की सीमा ₹20 करोड़ से घटाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है।
- निदेशक मंडल का 50% हिस्सा स्वतंत्र निदेशकों का होना अनिवार्य है।
- मीटर लगे घरों की संख्या बढ़ाकर 1.2 लाख तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
- नई नीति में आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के ऑडिट को अनिवार्य किया गया है।
अन्य प्रावधान और नीति का प्रभाव
इस नीति में ‘लैंडिंग पेज व्यूअरशिप’ को रेटिंग गणना से बाहर रखा गया है, हालांकि इसे विपणन उपकरण के रूप में उपयोग किया जा सकता है। प्रसारकों को इसकी जानकारी रेटिंग एजेंसियों को देनी होगी। साथ ही, शिकायत निवारण तंत्र, नोडल अधिकारी की नियुक्ति और उल्लंघनों के लिए चरणबद्ध दंड व्यवस्था भी लागू की गई है। इसके अलावा, टीवी वितरण प्लेटफॉर्म और ओटीटी सेवाओं को बिना पूर्व पंजीकरण के समय-समय पर दर्शक आंकड़े प्रकाशित करने की अनुमति दी गई है।
कुल मिलाकर, यह नई टीवी रेटिंग नीति भारत के प्रसारण क्षेत्र में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और विश्वसनीयता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दर्शकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ उद्योग के समग्र विकास को भी प्रोत्साहित करेगी।