ध्वनि स्पंदन पहल: दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए सुलभ सार्वजनिक परिवहन की दिशा में कदम

ध्वनि स्पंदन पहल: दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए सुलभ सार्वजनिक परिवहन की दिशा में कदम

कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम को “ध्वनि स्पंदन” नामक अपनी अभिनव पहल के लिए गवर्नेंस नाउ के 12वें पीएसयू नेशनल अवार्ड में “इनोवेशन में उत्कृष्टता” श्रेणी में सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार नई दिल्ली में आयोजित गवर्नेंस नाउ अवार्ड समारोह में प्रदान किया गया। यह सम्मान सार्वजनिक परिवहन को दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए किए गए निगम के प्रयासों को मान्यता देता है। इस पहल के माध्यम से परिवहन सेवाओं को अधिक समावेशी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए अभिनव प्रणाली

ध्वनि स्पंदन पहल के तहत बसों में एक विशेष पहचान और नेविगेशन प्रणाली विकसित की गई है, जो विशेष रूप से दृष्टिबाधित यात्रियों की सहायता के लिए बनाई गई है। यह प्रणाली ऑडियो आधारित सूचना के माध्यम से यात्रियों को बस की पहचान करने और यात्रा के दौरान मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद करती है। इससे दृष्टिबाधित यात्री सही बस की पहचान कर सकते हैं और अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी यात्रा कर सकते हैं। इस तकनीक से यात्रियों को यात्रा के दौरान होने वाली कठिनाइयों को कम करने में सहायता मिलती है।

मैसूर शहर की बसों में लागू व्यवस्था

यह प्रणाली कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा संचालित मैसूर सिटी ट्रांसपोर्ट की 200 बसों में लागू की गई है। इस परियोजना को जर्मनी की विकास एजेंसी जीआईजेड के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है। इस सहयोग के माध्यम से परिवहन प्रणाली में सहायक तकनीक को शामिल किया गया, जिससे सार्वजनिक परिवहन सेवाएं अधिक समावेशी और दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं के अनुरूप बन सकें।

स्वतंत्र गतिशीलता और सुरक्षा में सुधार

अधिकारियों के अनुसार ध्वनि स्पंदन प्रणाली के लागू होने से दृष्टिबाधित यात्रियों की दूसरों पर निर्भरता कम हुई है। यह प्रणाली उनकी सुरक्षा और सुविधा दोनों को बढ़ाती है तथा उन्हें स्वतंत्र रूप से यात्रा करने में सक्षम बनाती है। इसके माध्यम से शहरी परिवहन व्यवस्था में समान अवसर और समावेशन को बढ़ावा मिलता है। साथ ही यह पहल दृष्टिबाधित यात्रियों के आत्मविश्वास और गतिशीलता को भी मजबूत करती है।

समावेशी सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा

ध्वनि स्पंदन जैसी पहलें यह दर्शाती हैं कि तकनीक के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सुलभ और समावेशी बनाया जा सकता है। यह पहल न केवल दिव्यांगजनों के लिए परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाती है, बल्कि शहरी परिवहन नेटवर्क की समग्र पहुंच और उपयोगिता को भी मजबूत करती है। इस प्रकार की नवाचार आधारित पहलें भविष्य में समावेशी शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • केएसआरटीसी का पूरा नाम कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम है।
  • ध्वनि स्पंदन प्रणाली दृष्टिबाधित यात्रियों को बस की पहचान और नेविगेशन में सहायता प्रदान करती है।
  • जीआईजेड जर्मनी की एक विकास एजेंसी है जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग परियोजनाओं का समर्थन करती है।
  • सुलभ सार्वजनिक परिवहन समावेशी शहरी गतिशीलता नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Originally written on March 14, 2026 and last modified on March 14, 2026.

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