धारीदार लकड़बग्घा को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण देने का प्रस्ताव
मध्य एशिया के देश ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने धारीदार लकड़बग्घा को प्रवासी जंगली जीवों के संरक्षण संबंधी अंतरराष्ट्रीय समझौते में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण संबंधी सम्मेलन के 15वें सम्मेलन (सीएमएस COP15) में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह बैठक 23 से 29 मार्च के बीच ब्राज़ील के कैम्पो ग्रांडे शहर में आयोजित होने वाली है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो धारीदार लकड़बग्घा को वैश्विक स्तर पर उच्च स्तर का संरक्षण मिलेगा और इसके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के लिए प्रस्ताव का महत्व
ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान का मानना है कि इस प्रजाति को सीएमएस के परिशिष्ट–I और परिशिष्ट–II दोनों में शामिल करने से सदस्य देशों को इसके संरक्षण के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। इससे इस प्रजाति और इसके आवास की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय नीतियों को भी मजबूती मिलेगी।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि धारीदार लकड़बग्घा अक्सर भोजन और उपयुक्त आवास की तलाश में अलग-अलग देशों की सीमाएँ पार करता है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए सीमा-पार सहयोग और समन्वित रणनीतियाँ बेहद आवश्यक हैं।
जनसंख्या स्थिति और संरक्षण संबंधी चिंताएँ
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट के अनुसार धारीदार लकड़बग्घा को वैश्विक स्तर पर “निकट संकटग्रस्त” श्रेणी में रखा गया है, जबकि भूमध्यसागरीय क्षेत्र में इसे “असुरक्षित” माना जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया भर में इसकी परिपक्व आबादी लगभग 5,000 से 9,999 के बीच अनुमानित है। हालांकि इसकी वास्तविक संख्या का आकलन करना कठिन है क्योंकि यह प्रजाति मुख्यतः रात में सक्रिय रहती है और स्वभाव से काफी गुप्त होती है। आवास नष्ट होने और अन्य दबावों के कारण इसके संख्या में धीरे-धीरे गिरावट की आशंका भी जताई जा रही है।
व्यापक वितरण और प्रवासी व्यवहार
धारीदार लकड़बग्घा हायेनिडी परिवार की चार प्रमुख प्रजातियों में से एक है। अन्य तीन प्रजातियों में स्पॉटेड लकड़बग्घा, ब्राउन लकड़बग्घा और आर्डवुल्फ शामिल हैं।
यह प्रजाति विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तंत्रों में पाई जाती है, जिनमें सवाना क्षेत्र, अर्ध-रेगिस्तान, खुले जंगल, घास के मैदान और पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं। इसका वितरण अफ्रीका, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कई देशों में फैला हुआ है।
खासकर शुष्क क्षेत्रों में भोजन और पानी की तलाश में यह प्रजाति लंबी दूरी तक प्रवास करती है और अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करती है। यही कारण है कि इसके संरक्षण के लिए बहु-देशीय सहयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रवासी जंगली जीवों के संरक्षण संबंधी सम्मेलन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य प्रवासी प्रजातियों और उनके आवास की रक्षा करना है।
- इस समझौते के परिशिष्ट–I में उन प्रजातियों को शामिल किया जाता है जो विलुप्ति के गंभीर खतरे में होती हैं और जिन्हें कड़े संरक्षण की आवश्यकता होती है।
- परिशिष्ट–II में वे प्रजातियाँ शामिल होती हैं जिनके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक होता है।
- लकड़बग्घा परिवार में वर्तमान समय में चार जीवित प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
धारीदार लकड़बग्घा को अपने पूरे वितरण क्षेत्र में कई खतरों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास के कारण इसके प्राकृतिक आवास तेजी से कम हो रहे हैं। इसके अलावा शिकार प्रजातियों की कमी और पशुपालन पद्धतियों में बदलाव भी इसके अस्तित्व को प्रभावित कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में मनुष्य और वन्य जीवों के बीच संघर्ष के कारण किसानों द्वारा इसका शिकार भी किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रजाति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष संरक्षण मिल जाता है, तो विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा और इसके संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी हो सकेंगे।