देशभर में 14 वर्षीय बालिकाओं के लिए एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करेगा केंद्र
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देशभर में 14 वर्षीय बालिकाओं के लिए मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। यह टीका स्वैच्छिक होगा और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों की बालिकाओं को समान पहुंच मिल सके। इस पहल का उद्देश्य भारत में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते बोझ को कम करना है, जो महिलाओं में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।
क्वाड्रिवैलेंट गार्डासिल वैक्सीन का उपयोग
भारत में इस कार्यक्रम के तहत ‘गार्डासिल’ नामक क्वाड्रिवैलेंट एचपीवी वैक्सीन दी जाएगी। यह टीका एचपीवी प्रकार 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करता है, जो सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही यह प्रकार 6 और 11 से भी सुरक्षा देता है।
वैज्ञानिक अध्ययनों से प्रमाणित है कि अनुशंसित आयु वर्ग में एकल खुराक भी मजबूत और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती है। 14 वर्ष की आयु में टीकाकरण का उद्देश्य वायरस के संभावित संपर्क से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जब टीका अधिकतम प्रभावी होता है। टीकों की आपूर्ति वैश्विक सहयोग तंत्र और गैवी, द वैक्सीन एलायंस के साथ साझेदारी के माध्यम से सुनिश्चित की गई है, जिससे गुणवत्ता और कोल्ड चेन मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से क्रियान्वयन
टीकाकरण केवल निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में किया जाएगा, जिनमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उप-जिला एवं जिला अस्पताल तथा सरकारी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
प्रत्येक टीकाकरण सत्र प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारियों की निगरानी में आयोजित होगा। टीकाकरण के बाद अवलोकन की व्यवस्था भी की जाएगी। सभी केंद्र 24×7 सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े होंगे, ताकि दुर्लभ प्रतिकूल घटनाओं का त्वरित प्रबंधन किया जा सके और अभिभावकों का विश्वास बना रहे।
भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति
भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है। प्रतिवर्ष लगभग 80,000 नए मामले सामने आते हैं और 42,000 से अधिक महिलाओं की मृत्यु होती है। उच्च-जोखिम वाले एचपीवी प्रकार, विशेषकर 16 और 18, देश में 80 प्रतिशत से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।
एचपीवी टीके विश्व में सबसे अधिक अध्ययन किए गए टीकों में शामिल हैं और वैक्सीन-आवृत कैंसर-कारक प्रकारों के विरुद्ध 93–100 प्रतिशत तक प्रभावी पाए गए हैं। वर्ष 2006 से अब तक विश्वभर में 50 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं, जिससे इसकी सुरक्षा का मजबूत रिकॉर्ड स्थापित हुआ है। 90 से अधिक देश अब एकल-खुराक अनुसूची अपनाते हैं, जिससे कवरेज और किफायती उपलब्धता में वृद्धि हुई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एचपीवी प्रकार 16 और 18 सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।
- गार्डासिल एक क्वाड्रिवैलेंट, गैर-जीवित एचपीवी वैक्सीन है।
- गैवी (द वैक्सीन एलायंस) पात्र देशों में टीका खरीद का समर्थन करता है।
- राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) भारत में टीका नीति का मार्गदर्शन करता है।
यह कार्यक्रम साक्ष्य-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति का हिस्सा है और राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह की सिफारिशों के अनुरूप है। प्रारंभिक आयु में टीकाकरण के माध्यम से एचपीवी संक्रमण को रोककर सर्वाइकल कैंसर की दीर्घकालिक रोगग्रस्तता और मृत्यु दर को कम करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।