दुनिया का सबसे लंबा साँप: इंडोनेशिया के जंगलों में मिली “इबू बैरन”
इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप के घने जंगलों में खोजी गई एक विशाल मादा रेटिक्युलेटेड पायथन (Malayopython reticulatus) को आधिकारिक रूप से दुनिया का सबसे लंबा मापा गया साँप घोषित किया गया है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा पुष्टि की गई इस असाधारण खोज ने वन्यजीव दस्तावेज़ीकरण में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
रिकॉर्ड-तोड़ माप और विशेषताएं
इस साँप की लंबाई 7.22 मीटर (यानि 23 फीट 8 इंच) मापी गई है। इसे स्थानीय रूप से “इबू बैरन” या “द बैरोनेस” के नाम से जाना गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि साँप को पूर्णतः आराम की स्थिति में मापा जाता, तो यह लंबाई लगभग 10 प्रतिशत और अधिक हो सकती थी, लेकिन पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए ऐसा नहीं किया गया।
यह लंबाई इतनी अधिक है कि यह एक फीफा मानक गोलपोस्ट की चौड़ाई को भी पार कर सकती है, जो इसे और अधिक रोमांचक बनाती है।
खोज और संरक्षण प्रयास
इबू बैरन को दिसंबर 2025 में सुलावेसी द्वीप के मारोस काउंटी में खोजा गया। स्थानीय पर्यावरण संरक्षक बुडी पुरवांतो ने इसे सुरक्षित किया और सुनिश्चित किया कि साँप को कोई क्षति न पहुंचे। उनकी त्वरित कार्रवाई ने साँप की जान बचाई और वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया को संभव बनाया।
विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणन
इस विशालकाय साँप का आकलन और मापन कालिमंतान के वन्यजीव बचावकर्ता डियाज़ नुग्राहा और बाली निवासी विशेषज्ञ राडु फ्रेंटियु द्वारा किया गया। इसके पश्चात जॉर्ज बेक्कालोनी की सहायता से इसकी स्वतंत्र पुष्टि कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स तक विवरण पहुँचाया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रेटिक्युलेटेड पायथन, विश्व की सबसे लंबी साँप प्रजाति है।
- यह दक्षिण-पूर्वी एशिया, विशेषकर इंडोनेशिया में पाया जाता है।
- गिनीज रिकॉर्ड्स में जानवरों के माप में पशु कल्याण को सर्वोपरि माना जाता है।
- सुलावेसी, जैव विविधता से भरपूर इंडोनेशियाई द्वीप है।
पारिस्थितिकी और मानव-साँप संपर्क
रेटिक्युलेटेड पायथन जंगलों के शीर्ष शिकारी (apex predator) होते हैं और अपनी मजबूत कुंडली से शिकार को घोंटकर मारने में सक्षम होते हैं। इंडोनेशिया में ऐसे दुर्लभ लेकिन प्रामाणिक मामले सामने आए हैं, जिनमें 2024 में दक्षिण सुलावेसी में दो मनुष्यों की मृत्यु की पुष्टि हुई थी।
“इबू बैरन” की खोज एक ओर जहाँ इंडोनेशिया के वनों की अविश्वसनीय जैव विविधता को दर्शाती है, वहीं यह इस बात की भी याद दिलाती है कि मनुष्यों और विशाल वन्यजीवों के बीच संरक्षण आधारित सहअस्तित्व कितना आवश्यक है।