दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: PM CARES फंड को RTI के तहत निजता का अधिकार

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: PM CARES फंड को RTI के तहत निजता का अधिकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि भले ही PM CARES फंड को सरकार द्वारा संचालित या नियंत्रित माना जाए, फिर भी इसे सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत निजता का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) के अंतर्गत जो निजता का संरक्षण तीसरे पक्षों को दिया गया है, वह सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाओं पर समान रूप से लागू होता है।

RTI अधिनियम के तहत निजता का दायरा

मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मूल अधिकार के रूप में निजता से संबंधित नहीं है, बल्कि यह RTI अधिनियम की वैधानिक गोपनीयता (Statutory Privacy) से जुड़ा है। RTI की धारा 8(1)(j) के अनुसार किसी तीसरे पक्ष की “”व्यक्तिगत जानकारी तब तक साझा नहीं की जा सकती जब तक कि उसका सार्वजनिक हित में खुलासा आवश्यक न हो।

सार्वजनिक और निजी ट्रस्ट में कोई अंतर नहीं

कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि कोई संस्था सार्वजनिक कार्य कर रही है या सरकार द्वारा नियंत्रित हो रही है, वह अपनी कानूनी पहचान (juristic personality) नहीं खोती। अतः सार्वजनिक ट्रस्ट और निजी ट्रस्ट—दोनों की निजता का अधिकार बराबर है, जब तक कि निर्धारित विधिक प्रक्रिया के तहत जानकारी मांगी न जाए।

PM CARES फंड विवाद की पृष्ठभूमि

यह टिप्पणी उस अपील पर सुनवाई के दौरान की गई जिसमें PM CARES फंड द्वारा इनकम टैक्स अधिनियम के तहत छूट प्राप्त करने के लिए दाखिल दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इससे पहले केंद्रीय सूचना आयोग ने आयकर विभाग को उक्त दस्तावेज साझा करने का निर्देश दिया था। परंतु जनवरी 2024 में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने यह आदेश रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 138 RTI अधिनियम पर प्राथमिकता रखती है

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) तीसरे पक्ष की व्यक्तिगत जानकारी को संरक्षित करती है।
  • इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 138 कर संबंधित जानकारी के प्रकटीकरण को नियंत्रित करती है।
  • RTI अधिनियम की धारा 22 इसे अन्य कानूनों पर प्राथमिकता देती है, बशर्ते कि विशेष प्रावधान न हो।
  • न्यायिक व्यक्तित्व (juristic person) जैसे ट्रस्ट या सोसायटी भी वैधानिक गोपनीयता का दावा कर सकते हैं।

भविष्य की सुनवाई और तर्क

RTI आवेदनकर्ता गिरीश मित्तल ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी है और तर्क दिया है कि सरकार द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक ट्रस्ट RTI अधिनियम के तहत गोपनीयता का दावा नहीं कर सकता। अब यह मामला 10 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जब आयकर विभाग अपनी विस्तृत दलीलें कोर्ट के समक्ष पेश करेगा।

यह मामला भारत में पारदर्शिता बनाम गोपनीयता के जटिल संतुलन को उजागर करता है और इसके फैसले का असर RTI की भविष्य की व्याख्याओं पर भी पड़ सकता है

Originally written on January 14, 2026 and last modified on January 14, 2026.

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