दिल्ली लाल किले के पास विस्फोट में PETN विस्फोटक की आशंका
दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए हालिया विस्फोट ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। जांच में प्रारंभिक संकेत मिले हैं कि इस धमाके में PETN नामक सैन्य-ग्रेड के अत्यंत शक्तिशाली विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। PETN की उपस्थिति ने जांच को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि यह विस्फोटक आमतौर पर केवल उच्च जोखिम वाले आतंकी अभियानों में ही देखा जाता है।
PETN और उसकी विशेषताएँ
फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में मिले शुरुआती नमूनों से यह संकेत मिला है कि पेंटाएरिथ्रिटॉल टेट्रानाइट्रेट (PETN) का उपयोग किया गया है। यह एक उच्च गति से विस्फोट करने वाला नाइट्रेट यौगिक है, जो अमोनियम नाइट्रेट जैसे अन्य रासायनिक तत्वों के साथ मिलकर बेहद शक्तिशाली चार्ज बनाता है। PETN की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अत्यंत कम मात्रा में भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। यह गर्मी और घर्षण के प्रति संवेदनशील होता है और आसानी से प्लास्टिक विस्फोटकों में मिलाया जा सकता है।
प्रतिबंधित विस्फोटक की उपलब्धता पर सवाल
PETN का उपयोग सबसे गंभीर प्रश्न उठाता है आखिर यह विस्फोटक दिल्ली तक पहुँचा कैसे? भारत में PETN का वाणिज्यिक उत्पादन नहीं होता, बल्कि यह केवल रक्षा उद्देश्यों के लिए सीमित मात्रा में लाइसेंस प्राप्त संस्थानों द्वारा बनाया जाता है। इसके बावजूद, जम्मू-कश्मीर और केरल जैसे राज्यों में पहले भी PETN की अवैध खेपें पकड़ी जा चुकी हैं। इससे यह संभावना बढ़ती है कि देश में किसी गुप्त तस्करी नेटवर्क के माध्यम से यह विस्फोटक राजधानी तक लाया गया हो।
आपूर्ति श्रृंखला और नेटवर्क की जांच
PETN का पता लगाना अत्यंत कठिन होता है, विशेषकर जब इसे कम मात्रा में या अन्य रासायनिक पदार्थों के साथ मिलाया जाता है। इसी वजह से जांच एजेंसियाँ विस्फोट स्थल से मिले नमूनों की वैज्ञानिक पड़ताल कर रही हैं, CCTV फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है और राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 2011 के दिल्ली हाईकोर्ट विस्फोट में भी PETN का इस्तेमाल किया गया था, जिससे इस बार की घटना और भी गंभीर मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PETN एक अत्यंत शक्तिशाली सैन्य-ग्रेड विस्फोटक है जिसकी डिटोनेशन वेग बहुत अधिक होती है।
- भारत में इसका उत्पादन केवल लाइसेंस प्राप्त रक्षा संस्थानों द्वारा किया जाता है।
- 2011 के दिल्ली हाईकोर्ट विस्फोट में भी PETN का उपयोग पाया गया था।
- जब PETN अन्य रासायनिक यौगिकों के साथ मिश्रित होता है, तो इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है।
जांच की वर्तमान स्थिति
सुरक्षा एजेंसियाँ अब कई कोणों से जांच कर रही हैं जिसमें विस्फोटक के फोरेंसिक विश्लेषण, रासायनिक स्रोतों की पहचान, और संभावित तस्करी चैनलों का पता लगाना शामिल है। जांच का अगला चरण इस पर निर्भर करेगा कि प्रयोगशाला परीक्षणों में कौन-कौन से यौगिकों की पुष्टि होती है। यदि PETN की उपस्थिति निर्णायक रूप से सिद्ध होती है, तो यह सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा संकेत होगा कि देश में अत्यधिक प्रतिबंधित सैन्य विस्फोटक अब आतंकी नेटवर्क के हाथों में पहुँच रहे हैं।