दिल्ली में सर्दी का कहर: पहली तीव्र शीतलहर, पारा जमाव बिंदु के करीब, येलो अलर्ट जारी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस सर्दी की पहली तीव्र शीतलहर (Cold Wave) ने दस्तक दे दी है। तापमान में भारी गिरावट के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है और मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। इस ठंड ने जहां आम दिनचर्या को बाधित किया, वहीं स्वास्थ्य और वायु गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर डाला है।
राजधानी में तेज हुई शीतलहर की स्थिति
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली के प्रमुख वेदर स्टेशनों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया।
• सफदरजंग वेधशाला — जो दिल्ली की मानक वेधशाला मानी जाती है — ने 4.8°C दर्ज किया, जो औसत से काफी कम है।
• पलम, रिज और अयानगर जैसे क्षेत्रों में पारा और भी नीचे गया, जिससे यह इस सर्दी की पहली औपचारिक शीतलहर घटना बन गई।
पलम और अयानगर में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी
• पलम में न्यूनतम तापमान 3.0°C दर्ज किया गया, जो पिछले 13 वर्षों का सबसे कम है।
• अयानगर इस मौसम में अब तक सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां तापमान 2.9°C तक गिर गया।
• ऐतिहासिक रूप से, पलम का अब तक का सबसे न्यूनतम तापमान −2.2°C है, जो जनवरी 1967 में दर्ज किया गया था।
मौसम पूर्वानुमान और आगामी तापमान की स्थिति
IMD के अनुसार:
• शीतलहर की स्थिति अगले दो दिनों तक जारी रहने की संभावना है।
• न्यूनतम तापमान 3°C से 5°C के बीच रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान 17°C से 19°C के बीच बना रह सकता है।
• किसी स्थान पर शीतलहर घोषित तब की जाती है जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5°C से 6.4°C नीचे चला जाए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
• शीतलहर की परिभाषा सामान्य न्यूनतम तापमान से गिरावट के आधार पर तय की जाती है।
• सफदरजंग वेधशाला दिल्ली की मानक मौसम वेधशाला है।
• पलम का 3.0°C तापमान जनवरी माह में 13 वर्षों में सबसे कम है।
• दिल्ली का अब तक का सबसे न्यूनतम तापमान −2.2°C (जनवरी 1967, पलम) है।
खराब वायु गुणवत्ता बनी हुई है चिंता का विषय
जहां ठंड ने शहर को जकड़ रखा है, वहीं दिल्ली की वायु गुणवत्ता भी ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 291 रहा। कई मॉनिटरिंग स्टेशनों ने ‘बहुत खराब’ गुणवत्ता दर्ज की, और आगामी दिनों में इसमें कोई विशेष सुधार की संभावना नहीं दिख रही।
दिल्ली में सर्दी और प्रदूषण की दोहरी मार ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि मौसमी बदलाव और पर्यावरणीय संकट अब राजधानी के स्थायी और गंभीर मुद्दे बनते जा रहे हैं।