दिल्ली जन विश्वास विधेयक 2026: छोटे अपराधों के अपराधीकरण पर रोक का बड़ा कदम
दिल्ली सरकार ने एक अहम प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए दिल्ली जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य छोटे और तकनीकी अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और राष्ट्रीय राजधानी में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाना है।
नीति का उद्देश्य और शासन दर्शन
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन दर्शन से प्रेरित है, जो न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन की सोच पर आधारित है। विधेयक का उद्देश्य है:
- न्यायालयों पर बोझ कम करना
- अनावश्यक अपराधीकरण को रोकना
- प्रशासनिक कार्यकुशलता को बढ़ाना
यह विधेयक केंद्र सरकार द्वारा पारित जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम की भावना के अनुरूप है, जिसमें कई केंद्रीय कानूनों के तहत छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाया गया था।
अपराध से प्रशासनिक दंड की ओर बदलाव
केंद्र सरकार की सलाह के बाद दिल्ली सरकार ने अपने कानूनों की समीक्षा की और पाया कि कई मामलों में दीवानी दंड (civil penalties) आपराधिक कार्रवाई से अधिक उचित हैं। नए विधेयक के तहत:
- छोटे, तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों पर आपराधिक कार्रवाई की जगह प्रशासनिक जुर्माना लगाया जाएगा।
- अपील की स्पष्ट प्रक्रिया होगी।
- जन-स्वास्थ्य, सार्वजनिक सुरक्षा और जीवन को प्रभावित करने वाले मामलों में आपराधिक प्रावधान यथावत रहेंगे।
किन कानूनों को शामिल किया गया है
यह विधेयक दिल्ली सरकार के कई कानूनों को अपने दायरे में लाता है, जिनमें प्रमुख हैं:
- दिल्ली औद्योगिक विकास, संचालन और रखरखाव अधिनियम, 2010
- दिल्ली दुकान और स्थापना अधिनियम, 1954
- दिल्ली जल बोर्ड अधिनियम, 1998
- दिल्ली कृषि उपज विपणन (विनियमन) अधिनियम, 1998
इसके अलावा, व्यावसायिक कॉलेजों, तकनीकी संस्थानों और बेड-एंड-ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों से जुड़े कानूनों को भी शामिल किया गया है, जहाँ छोटे अपराधों को दीवानी दंडों में बदला जाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- दिल्ली जन विश्वास विधेयक, 2026 का उद्देश्य छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाना है।
- आपराधिक दंड की जगह प्रशासनिक जुर्माना और अपील प्रक्रिया लाई जाएगी।
- यह विधेयक केंद्र के जन विश्वास अधिनियम से प्रेरित है।
- सार्वजनिक सुरक्षा और जीवन संबंधी अपराधों को यथावत रखा गया है।
क्रियान्वयन और विधायी प्रक्रिया
विधेयक में यह प्रावधान है कि प्रत्येक तीन वर्षों में जुर्माने की राशि में 10% की स्वतः वृद्धि की जाएगी, जिससे महंगाई के प्रभाव को संतुलित किया जा सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस सुधार के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार या नई भर्तियों की आवश्यकता नहीं होगी, और मौजूदा विभागीय संसाधनों से ही इसे लागू किया जाएगा।
वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं जताई है और यह विधेयक आगामी शीतकालीन सत्र में दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
यह विधेयक एक ऐसे शासन की दिशा में संकेत देता है जो जिम्मेदार नागरिकता, प्रशासनिक सरलता और उद्योग के अनुकूल वातावरण को प्राथमिकता देता है।