दिल्ली के लाल क़िला विस्फोट में थ्रीमा ऐप की भूमिका

दिल्ली के लाल क़िला क्षेत्र में हुए हालिया विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस घटना में कई लोगों की जान गई और जांच एजेंसियों ने इसे राजधानी में सक्रिय एक संभावित नेटवर्क की बड़ी साजिश के रूप में देखा। इस जांच में एक नाम बार-बार सामने आया थ्रीमा (Threema), एक स्विट्ज़रलैंड-आधारित एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, जिसका इस्तेमाल आरोपियों ने गुप्त संचार के लिए किया था।

थ्रीमा के जरिए साजिश की रूपरेखा

अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने थ्रीमा की तकनीकी संरचना का उपयोग कर एक बंद नेटवर्क बनाया था। थ्रीमा की खासियत यह है कि इसमें न तो फोन नंबर की आवश्यकता होती है और न ही ईमेल आईडी की। हर उपयोगकर्ता को एक यादृच्छिक रूप से उत्पन्न आईडी दी जाती है, जिससे उनकी पहचान का पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने संभवतः एक निजी सर्वर का उपयोग किया, जिसके ज़रिए वे फाइलें साझा करते, वॉइस मैसेज भेजते और संदेशों को दोनों तरफ़ से मिटा देते थे, जिससे जांच एजेंसियों को बहुत कम डिजिटल सबूत मिल पाए।

गुप्त नेटवर्क के लिए थ्रीमा क्यों आकर्षक

थ्रीमा की लोकप्रियता उसकी गोपनीयता-केंद्रित संरचना के कारण है। यह प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं की कोई मेटाडाटा जानकारी संग्रहीत नहीं करता और डेटा एन्क्रिप्शन पूरी तरह डिवाइस पर ही होता है। हालांकि यह विशेषताएं निजता पसंद उपयोगकर्ताओं के लिए बनाई गई थीं, लेकिन यही कारण आपराधिक या आतंकवादी नेटवर्कों को भी आकर्षित करता है। भारत में पहले से ही कई ऐसे ऐप्स प्रतिबंधित किए जा चुके हैं जो इसी तरह की गुमनाम पहचान और स्वयं-विनष्ट संदेशों की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे निगरानी और खुफिया कार्यवाही कठिन हो जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • थ्रीमा (Threema) स्विट्ज़रलैंड की एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा है।
  • भारत में इसे 2023 में प्रतिबंधित कर दिया गया था।
  • थ्रीमा में उपयोगकर्ता पहचान के लिए रैंडम यूज़र आईडी दी जाती है, न कि फोन नंबर या ईमेल।
  • यह ऐप न्यूनतम मेटाडाटा रखता है और दोनों पक्षों से संदेश मिटाने की सुविधा देता है।
  • कई अपराधी नेटवर्क ऐसे गोपनीय ऐप्स का उपयोग निगरानी से बचने के लिए करते हैं।

जांच और तकनीकी चुनौतियाँ

जांच एजेंसियों ने जब अन्य एन्क्रिप्टेड चैनल्स की कड़ियाँ जोड़ीं, तो थ्रीमा का लिंक स्पष्ट हुआ। हालांकि, ऐप की सीमित मेटाडाटा नीति और उच्च एन्क्रिप्शन स्तर के कारण फॉरेंसिक विश्लेषण कठिन साबित हो रहा है। विशेषज्ञ अभी भी जब्त किए गए उपकरणों से डेटा पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि इस नेटवर्क की पूरी संरचना का पता चल सके। अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी बाधाओं के बावजूद समय पर की गई कार्रवाई ने राजधानी में संभावित बड़े हमलों की श्रृंखला को रोक दिया।

Originally written on November 15, 2025 and last modified on November 15, 2025.

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