दिग्गज संगीतकार एस.पी. वेंकटेश का निधन: मलयालम सिनेमा को अलविदा कह गया एक महान सुर साधक
दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया को गहरा आघात पहुंचाते हुए प्रसिद्ध संगीतकार एस.पी. वेंकटेश का 70 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्होंने चेन्नई स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। मलयालम सिनेमा को अपनी अनूठी धुनों और प्रभावशाली बैकग्राउंड स्कोर से नई ऊंचाइयां देने वाले वेंकटेश एक संगीतमय युग की पहचान बन चुके थे।
एक गिटारिस्ट से महान संगीत निर्देशक बनने की यात्रा
एस.पी. वेंकटेश ने 1971 में एक गिटारिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 1975 से कन्नड़ सिनेमा में सहायक संगीत निर्देशक के तौर पर काम करना शुरू किया। वरिष्ठ संगीतकार राघवन मास्टर समेत कई दिग्गजों के साथ सहयोग करते हुए उन्होंने संगीत की बारीकियों को आत्मसात किया। 1981 में तेलुगु फिल्म “प्रेमा युद्धम” से उन्हें स्वतंत्र संगीत निर्देशक के रूप में पहला ब्रेक मिला। लेकिन उनके करियर की असली पहचान बनी मलयालम फिल्में, जहां उन्होंने अपनी एक अलग ही धुन रच दी।
मलयालम सिनेमा के स्वर्ण युग को संगीतबद्ध करने वाले कलाकार
वेंकटेश को मलयालम फिल्म “राजाविन्ते माकन” से बड़ा ब्रेक मिला, जिसमें सुपरस्टार मोहनलाल मुख्य भूमिका में थे। इसके बाद उन्होंने डेनिस जोसेफ, थंपी कन्नंथनम और जोशी जैसे कई दिग्गज निर्देशकों के साथ लगातार सफल सहयोग किया। उनकी रचनाएं “किलुक्कम”, “मिन्नारम”, “जॉनी वॉकर”, “ध्रुवम”, “वल्सल्याम”, “पैत्रुकम”, “स्फाडिकम”, “मन्नार माथाई स्पीकिंग”, और “मंत्रिकम” जैसी फिल्मों को अमर बना गईं।
पुरस्कार और पृष्ठभूमि संगीत में उत्कृष्टता
1993 में वेंकटेश को “पैत्रुकम” और “जनम” फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का केरल राज्य फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनके गीत जितने लोकप्रिय हुए, उतना ही प्रभावशाली रहा उनका बैकग्राउंड स्कोर। “देवासुरम”, “महायानम”, “नंबर 20 मद्रास मेल”, और “अप्पू” जैसी फिल्मों में उनके पृष्ठभूमि संगीत ने दृश्य प्रभावों को नई ऊंचाइयां दीं और दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- केरल राज्य फिल्म पुरस्कार भारत के सबसे पुराने राज्य स्तरीय फिल्म पुरस्कारों में से एक हैं।
- बैकग्राउंड स्कोर किसी फिल्म की भावनात्मक और नैरेटिव गहराई को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
- मलयालम सिनेमा को आमतौर पर “मोलिवुड” कहा जाता है।
- भारतीय फिल्म संगीतकार प्रायः विभिन्न भाषाई फिल्म उद्योगों में समानांतर रूप से कार्य करते हैं।
मलयालम फिल्म उद्योग की श्रद्धांजलि
वेंकटेश के निधन से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। अभिनेता सुरेश गोपी ने उन्हें “समय से परे चलने वाले सुरों का रचयिता” बताया। निर्देशक बी. उन्नीकृष्णन ने कहा कि वेंकटेश में रोमांटिक और थ्रिलर दोनों विधाओं को ऊंचाई देने की अद्भुत क्षमता थी। सुप्रसिद्ध गायक एम.जी. श्रीकुमार ने इसे निजी क्षति बताते हुए कहा कि “मलयाली लोग उनकी रचनाओं को पीढ़ियों तक गुनगुनाते रहेंगे।” अंतिम संस्कार चेन्नई के आलापक्कम में संपन्न होगा।
वेंकटेश के निधन से भारतीय सिनेमा ने न केवल एक महान संगीतकार, बल्कि एक ऐसे युग को खो दिया है जिसने धुनों के माध्यम से कहानियों को जीवन दिया। उनकी रचनाएं हमेशा श्रोताओं के हृदय में जीवित रहेंगी।