दिग्गज मलयालम अभिनेता पुन्नाप्रा अप्पाचन का निधन
मलयालम सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता पुन्नाप्रा अप्पाचन का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। गिरने से सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें पहले एर्नाकुलम और फिर वंदनम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आंतरिक रक्तस्राव के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ मलयालम सिनेमा का वह अध्याय समाप्त हो गया, जिसने लगभग छह दशकों तक चरित्र अभिनय की मजबूत परंपरा को जीवित रखा।
श्वेत-श्याम दौर से शुरू हुआ फिल्मी सफर
पुन्नाप्रा अप्पाचन ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1965 में श्वेत-श्याम फिल्म Othenante Makan से की थी, जिसमें प्रसिद्ध अभिनेता सत्यन ने मुख्य भूमिका निभाई थी। शुरुआती वर्षों में ही उन्होंने एक भरोसेमंद कलाकार के रूप में पहचान बना ली। समय के साथ वे मलयालम सिनेमा के सबसे पहचाने जाने वाले सहायक अभिनेताओं में शामिल हो गए। अपने लंबे करियर में उन्होंने एक हजार से अधिक फिल्मों में अभिनय किया, जो उनकी अनुशासनप्रियता और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
सशक्त चरित्र और खलनायक भूमिकाएं
अप्पाचन अपनी गहन स्क्रीन उपस्थिति और यथार्थपरक अभिनय के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। Anubhavangal Paalichakal में ट्रेड यूनियन नेता की भूमिका में उनका अभिनय आज भी याद किया जाता है, जिसने उन्हें आलोचकों की सराहना दिलाई। सीमित संवाद और छोटे दृश्यों में भी वे अपने पात्र को प्रभावी ढंग से जीवंत कर देते थे, जो उनकी अभिनय क्षमता की पहचान थी।
प्रतिष्ठित निर्देशकों के साथ सहयोग
उनके करियर का एक महत्वपूर्ण चरण प्रसिद्ध फिल्मकार अदूर गोपालकृष्णन के साथ उनके लंबे सहयोग से जुड़ा रहा। Anantaram से शुरू होकर उन्होंने अदूर की सभी फिल्मों में अभिनय किया, जो निर्देशक के उनके शिल्प पर विश्वास को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने पद्मराजन की चर्चित फिल्म Njaan Gandharvan में भी यादगार भूमिका निभाई। बॉलीवुड में भी उन्होंने Duniya में दिलीप कुमार के साथ एक पुलिस अधिकारी की भूमिका अदा की।
श्रद्धांजलि और विरासत
निर्देशक विनयन सहित कई फिल्मकारों और कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अप्पाचन पीढ़ियों के बीच सेतु की तरह थे—उन्होंने सत्यन और नज़ीर के दौर से लेकर नई पीढ़ी की फिल्मों तक समान समर्पण के साथ काम किया। उनकी विरासत निरंतरता, सादगी और बहुआयामी अभिनय में निहित है। मलयालम सिनेमा में रोज़मर्रा के यथार्थ को पर्दे पर उतारने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पुन्नाप्रा अप्पाचन ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1965 में की थी।
- उन्होंने एक हजार से अधिक मलयालम फिल्मों में अभिनय किया।
- वे निर्देशक अदूर गोपालकृष्णन के नियमित सहयोगी रहे।
- मलयालम सिनेमा चरित्र-प्रधान और यथार्थवादी कथानक के लिए जाना जाता है।
कुल मिलाकर, पुन्नाप्रा अप्पाचन का जाना मलयालम सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।