दक्षिण एशिया की वृद्धि में भारत रहेगा प्रमुख चालक
विश्व बैंक की अप्रैल 2026 में जारी ताज़ा क्षेत्रीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत आने वाले वर्षों में दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार बना रहेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं और उभरते बाजारों पर दबाव के बावजूद भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था क्षेत्रीय विकास को गति देती रहेगी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दक्षिण एशिया में समग्र मंदी के बीच भारत का प्रदर्शन पूरे क्षेत्र को संतुलित बनाए रखेगा।
विकास दर में स्थिरता और मजबूती
विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था FY25 में 7.1 प्रतिशत से बढ़कर FY26 में 7.6 प्रतिशत तक पहुंची है। FY27 के लिए विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहले के 6.3 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। यह दर्शाता है कि भारत न केवल दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, बल्कि सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में भी शामिल है।
उपभोग और निर्यात बने प्रमुख आधार
भारत की आर्थिक वृद्धि में निजी उपभोग की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। महंगाई में कमी और जीएसटी में किए गए सुधारों के कारण लोगों की क्रय शक्ति में वृद्धि हुई है, जिससे मांग को बढ़ावा मिला है। इसके अलावा, निर्यात क्षेत्र ने भी वैश्विक चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। यह संतुलन भारत को बाहरी झटकों से बचाने में मदद करता है।
पश्चिम एशिया तनाव से जोखिम
रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को एक प्रमुख जोखिम के रूप में चिन्हित किया गया है। ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती हैं। चूंकि दक्षिण एशिया के अधिकांश देश ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, इसलिए ऐसे झटकों से विकास दर प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि क्षेत्रीय वृद्धि 2025 के 7 प्रतिशत से घटकर 2026 में 6.3 प्रतिशत रह सकती है।
महंगाई और अनिश्चित भविष्य
विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि मजबूत घरेलू मांग के कारण महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि कर सुधार उपभोग को समर्थन देते रहेंगे, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। विभिन्न अनुमानों के अनुसार FY27 में भारत की विकास दर 5.9 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जो बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत दक्षिण एशिया की जीडीपी वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान देता है।
- विश्व बैंक समय-समय पर “साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट” जारी करता है।
- ऊर्जा कीमतों में वृद्धि आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करती है।
- जीएसटी सुधार भारत में घरेलू उपभोग को प्रभावित करते हैं।
भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति यह संकेत देती है कि वह न केवल अपने विकास को बनाए रखेगा, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था को भी दिशा देगा। हालांकि वैश्विक जोखिम बने हुए हैं, फिर भी भारत की स्थिर नीतियां और मजबूत घरेलू मांग उसे आगे बढ़ने में सहायक साबित होंगी।