दक्षिण अफ्रीका का सबसे पुराना हिंदू मंदिर संकट में: उंबिलो श्री अंबलावानार अलायम के सामने आर्थिक चुनौती

दक्षिण अफ्रीका का सबसे पुराना हिंदू मंदिर संकट में: उंबिलो श्री अंबलावानार अलायम के सामने आर्थिक चुनौती

दक्षिण अफ्रीका के डरबन स्थित उंबिलो श्री अंबलावानार अलायम, जो देश का सबसे पुराना हिंदू मंदिर और एक राष्ट्रीय विरासत स्थल है, इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। 151 वर्ष पुराने इस मंदिर पर पांच लाख रैंड से अधिक की बकाया नगरपालिका देनदारी है, जिससे मूलभूत सेवाएं बंद होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

आर्थिक संकट और ऐतिहासिक महत्व

  • 1873 में स्थापित यह मंदिर उन भारतीय बंधुआ मजदूरों द्वारा बनाया गया था जो 1860 में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे
  • यह मंदिर 1980 में ‘नेशनल हेरिटेज साइट’ घोषित किया गया था, जो दक्षिण अफ्रीका में भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक प्रमुख प्रतीक है।
  • मंदिर प्रबंधन ने हाल ही में एक जन सूचना पत्र के माध्यम से इस आर्थिक संकट की जानकारी दी, जिससे भारतीय मूल समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है।

वित्तीय अनियमितताएं और फॉरेंसिक ऑडिट

  • मंदिर की आधिकारिक सोशल मीडिया पर साझा की गई सूचनाओं में वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी की आशंका व्यक्त की गई है।
  • मंदिर प्रशासन ने फॉरेंसिक ऑडिट करवाने की घोषणा की है ताकि बीते वर्षों के वित्तीय लेन-देन की जांच की जा सके।
  • हालांकि किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया है, परंतु गवर्नेंस और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।

समुदाय की भागीदारी और समर्थन की अपील

  • साउथ अफ्रीकन हिंदू महा सभा ने मंदिर को बचाने के लिए समुदाय से समर्थन की अपील की है।
  • यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि प्रवासी भारतीय समुदाय के सांस्कृतिक इतिहास का जीवंत प्रतीक भी है।
  • नगरपालिका सेवाओं के बंद होने से नित्य पूजा-अर्चना और संरक्षण कार्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • उंबिलो श्री अंबलावानार अलायम दक्षिण अफ्रीका का सबसे पुराना हिंदू मंदिर है।
  • इसकी स्थापना 19वीं सदी में भारतीय बंधुआ मजदूरों द्वारा की गई थी।
  • 1980 में इसे राष्ट्रीय धरोहर स्थल घोषित किया गया।
  • साउथ अफ्रीकन हिंदू महा सभा हिंदू समुदाय के हितों की राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि संस्था है।

संरक्षण और उत्तरदायित्व की मांग

मंदिर की विरासत स्थिति को देखते हुए संरक्षण कार्यों को जारी रखना अनिवार्य है। सामुदायिक नेताओं और विरासत कार्यकर्ताओं ने मंदिर के सतत संचालन, पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और प्रभावी निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया है। यह संकट केवल मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रवासी भारतीय इतिहास और संस्कृति की सुरक्षा का भी सवाल है।

Originally written on January 25, 2026 and last modified on January 25, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *