दक्षिणी लेबनान में सफेद फॉस्फोरस के उपयोग का आरोप, बढ़ा विवाद

दक्षिणी लेबनान में सफेद फॉस्फोरस के उपयोग का आरोप, बढ़ा विवाद

ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने इजरायल पर दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों में सफेद फॉस्फोरस गोला-बारूद का अवैध उपयोग करने का आरोप लगाया है। यह आरोप उस समय सामने आया है जब इजरायल और लेबनान की सीमा पर हिज़्बुल्लाह से जुड़े संघर्षों के कारण तनाव लगातार बढ़ रहा है। मानवाधिकार संगठन के अनुसार आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसे हथियारों का उपयोग नागरिकों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।

योह्मोर शहर में घटना पर एचआरडब्ल्यू की रिपोर्ट

न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार संगठन ने बताया कि 3 मार्च 2026 को इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के योह्मोर शहर के ऊपर सफेद फॉस्फोरस से युक्त तोपखाने के गोले दागे। एचआरडब्ल्यू के अनुसार उसने कई तस्वीरों का सत्यापन और भू-स्थान निर्धारण किया है, जिनमें हवा में फटने वाले सफेद फॉस्फोरस गोले रिहायशी क्षेत्रों के ऊपर विस्फोट करते हुए दिखाई देते हैं। इन तस्वीरों में नागरिक सुरक्षा कर्मियों को घरों और वाहनों में लगी आग बुझाने की कोशिश करते हुए भी देखा गया, जिससे नागरिक संपत्ति को नुकसान होने का संकेत मिलता है।

सफेद फॉस्फोरस क्या है?

सफेद फॉस्फोरस एक रासायनिक पदार्थ है जो ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही तुरंत जल उठता है। सैन्य बल अक्सर इसका उपयोग धुआं उत्पन्न करने, युद्धक्षेत्र को रोशन करने या लक्ष्य चिन्हित करने के लिए करते हैं। हालांकि जब इसे आग लगाने वाले हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो यह गंभीर जलन, श्वसन तंत्र को नुकसान, अंगों की विफलता और मृत्यु तक का कारण बन सकता है। यह पदार्थ अत्यधिक तीव्रता से जलता है और तेजी से फैलता है, इसलिए आबादी वाले क्षेत्रों में इसका उपयोग अत्यंत विवादास्पद माना जाता है।

इजरायल–लेबनान सीमा पर बढ़ता तनाव

ये आरोप उस समय सामने आए हैं जब दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर इजरायल लगातार सैन्य अभियान चला रहा है। ईरान समर्थित इस उग्रवादी संगठन के हमलों के बाद इजरायल ने सीमा क्षेत्रों में कई हवाई हमले किए हैं और जमीनी बलों को भी तैनात किया है। लेबनान के अधिकारियों के अनुसार हालिया हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और संघर्ष के कारण पांच लाख से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सफेद फॉस्फोरस ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही जल उठता है और घना धुआं उत्पन्न करता है।
  • रासायनिक हथियार संधि के तहत सफेद फॉस्फोरस को औपचारिक रूप से रासायनिक हथियार की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार नागरिक क्षेत्रों में आग लगाने वाले हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध या कड़ी सीमाएं लागू होती हैं।
  • लेबनान की लितानी नदी इजरायल–लेबनान सुरक्षा व्यवस्थाओं में एक महत्वपूर्ण भौगोलिक संदर्भ रेखा मानी जाती है।

जांच और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की मांग

ह्यूमन राइट्स वॉच ने इजरायल से तुरंत रिहायशी इलाकों में सफेद फॉस्फोरस के उपयोग को रोकने की अपील की है। साथ ही संगठन ने उन देशों से भी आग्रह किया है जो इजरायल को हथियार आपूर्ति करते हैं कि वे अपनी सैन्य सहायता की समीक्षा करें। लेबनान के अधिकारियों ने भी इजरायली सैन्य कार्रवाइयों से होने वाले पर्यावरणीय और मानवीय नुकसान पर चिंता जताई है। इन आरोपों के बाद चल रहे संघर्ष और उसके नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और चर्चा की मांग तेज हो गई है।

Originally written on March 11, 2026 and last modified on March 11, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *