थैलेसीमिया रोगियों के लिए पहली मौखिक दवा को USFDA की मंजूरी: इलाज में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद
थैलेसीमिया से पीड़ित लाखों रोगियों के लिए एक ऐतिहासिक और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) ने थैलेसीमिया से संबंधित एनीमिया के इलाज के लिए दुनिया की पहली मौखिक दवा को मंजूरी दे दी है। मिटापिवैट (Mitapivat), जिसे ब्रांड नाम Aqvesme के तहत बेचा जाएगा, अब वयस्क रोगियों के लिए उपलब्ध होगी — यह कदम थैलेसीमिया उपचार के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
ऐतिहासिक मंजूरी: थैलेसीमिया के दोनों रूपों के लिए पहली दवा
USFDA ने मिटापिवैट को उन वयस्कों के लिए अधिकृत किया है जो अल्फा-थैलेसीमिया या बीटा-थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। विशेष बात यह है कि यह दवा उन रोगियों के लिए भी मान्य है जो नियमित रक्त संक्रमण पर निर्भर हैं, और उन रोगियों के लिए भी जिनका इलाज बिना रक्त संक्रमण के किया जाता है। अब तक थैलेसीमिया का इलाज मुख्यतः बार-बार रक्त संक्रमण और लोहे की अधिकता को नियंत्रित करने वाली चिकित्सा पर आधारित रहा है।
दवा का कार्यप्रणाली: रेड ब्लड सेल्स को दी ऊर्जा
मिटापिवैट एक पायरूवेट किनेस सक्रियक (pyruvate kinase activator) है जो लाल रक्त कोशिकाओं के भीतर की ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया को सशक्त करता है। थैलेसीमिया में रेड ब्लड सेल्स कमजोर होती हैं और जल्दी टूट जाती हैं जिससे पुरानी एनीमिया की स्थिति बनी रहती है। यह दवा इन कोशिकाओं को अधिक समय तक जीवित रखती है, हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाती है, और बार-बार रक्त संक्रमण की आवश्यकता को कम करती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
नोएडा स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के डॉक्टर सत्यं अरोड़ा ने इस खोज को “पथ-प्रदर्शक” बताया और कहा कि यह थैलेसीमिया के इलाज को एक ही गोली के रूप में सुलभ बना सकता है। वहीं, वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. राहुल भार्गव ने कहा कि यह पहली दवा है जो बीमारी को उसकी मूल कोशिकीय गड़बड़ी के स्तर पर लक्षित करती है, जिससे यह रोगियों के जीवन की गुणवत्ता को अत्यधिक बेहतर बना सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मिटापिवैट थैलेसीमिया से पीड़ित वयस्कों में एनीमिया के इलाज के लिए पहली मौखिक दवा है।
- यह दवा पायरूवेट किनेस सक्रियक के रूप में कार्य करती है और लाल रक्त कोशिकाओं की जीवन अवधि बढ़ाती है।
- इसे USFDA (अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन) द्वारा अनुमोदन प्राप्त हुआ है।
- यह दवा ट्रांसफ्यूजन-निर्भर और गैर-निर्भर दोनों प्रकार के थैलेसीमिया में प्रभावी है।
भारत में संभावित प्रभाव
भारत विश्व में थैलेसीमिया रोगियों के सबसे बड़े समूहों में से एक है, जहां विश्व के कुल थैलेसीमिया रोगियों का लगभग आठवां हिस्सा पाया जाता है। इस मौखिक दवा की उपलब्धता से भारत में रक्त संक्रमण की मांग घट सकती है, संक्रमण-सम्बंधित जटिलताओं में कमी आ सकती है, और दीर्घकालिक उपचार परिणाम बेहतर हो सकते हैं। रोगी अधिकार समूहों ने आशा जताई है कि यह दवा भारत में जल्द उपलब्ध होगी और थैलेसीमिया के इलाज को अधिक टिकाऊ और रोगी-केंद्रित बनाएगी।
यह दवा न केवल एक चिकित्सकीय प्रगति है, बल्कि थैलेसीमिया से जूझ रहे लाखों परिवारों के लिए आशा की एक नई किरण है। अब चुनौती यह होगी कि इस चिकित्सा को भारत जैसे देशों में शीघ्रता से सुलभ और किफायती बनाया जाए।