त्रिपुरा में ₹80 करोड़ की अगरवुड वैल्यू चेन विकास योजना का शुभारंभ
पूर्वोत्तर क्षेत्र और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्रिपुरा के नॉर्थ फुलकबारी में ₹80 करोड़ की अगरवुड वैल्यू चेन विकास योजना की आधारशिला रखी। यह पहल पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक अगरवुड अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, निर्यात विस्तार करना और त्रिपुरा को अगरवुड-आधारित उत्पादों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
पूर्वोत्तर के अगरवुड क्षेत्र को नई शक्ति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री सिंधिया ने कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित और आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर” के दृष्टिकोण को साकार करती है। उन्होंने बताया कि भारत में अगरवुड उत्पादन मुख्यतः त्रिपुरा और असम में केंद्रित है। यह योजना इन दोनों राज्यों की पूर्ण क्षमता को उन्नत तकनीक, विपणन और वैश्विक पहुंच के माध्यम से साकार करने का माध्यम बनेगी।
खेत से वैश्विक बाजार तक: पूरी वैल्यू चेन का विकास
यह परियोजना अगरवुड की संपूर्ण वैल्यू चेन को विकसित करने पर केंद्रित है — किसानों की भूमि पर पेड़ लगने से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अगरवुड तेल और इत्र जैसे तैयार उत्पादों की बिक्री तक। इस योजना के तहत असम के गोलाघाट और त्रिपुरा में दो केंद्रीय प्रोसेसिंग केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इन केंद्रों में प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधाएं होंगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसान अपने उत्पाद का पूरा मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम किसानों की आर्थिक स्थिरता में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाला है।
जीआई टैग, निर्यात वृद्धि और डिजिटल एकीकरण
मंत्री सिंधिया ने अगरवुड क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा योग्य बनाने हेतु उठाए गए कई उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगरवुड के लिए भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा अगरवुड चिप्स के निर्यात को छह गुना बढ़ाकर 25,000 किलोग्राम से 1.5 लाख किलोग्राम और अगरवुड तेल के निर्यात को 1,500 किलोग्राम से बढ़ाकर 7,500 किलोग्राम कर दिया गया है।
निर्यात की अनुमतियाँ और विनियामक प्रक्रियाएं अब डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे किसान सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बना सकें।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अगरवुड एक सुगंधित राल है जिसका उपयोग इत्र और पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है।
- भारत के लगभग 90% अगरवुड वृक्ष पूर्वोत्तर राज्यों में स्थित हैं।
- भौगोलिक संकेतक (GI Tag) किसी क्षेत्र विशेष के उत्पाद को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है और निर्यात को बढ़ावा देता है।
- ‘ODOP’ योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले के एक विशिष्ट उत्पाद को आर्थिक विकास के लिए प्रोत्साहित करना है।
‘लोकल टू ग्लोबल’ की दिशा में त्रिपुरा
सिंधिया ने फुलकबारी के अगरवुड क्षेत्र को ‘लोकल टू ग्लोबल’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ की भावना का सशक्त उदाहरण बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना त्रिपुरा की अगरवुड उत्पादन क्षमता को 50% तक बढ़ा सकती है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा के नेतृत्व में आयोजित होने वाले वैश्विक खरीदार-बेचने वाले सम्मेलनों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के सहयोग से त्रिपुरा का अगरवुड बाज़ार अगले तीन से चार वर्षों में ₹2,000 करोड़ के वार्षिक कारोबार तक पहुंच सकता है। यह न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि किसानों की आजीविका में भी व्यापक परिवर्तन लाएगा।