त्रिपुरा में महिलाओं के लिए ‘नारी अदालत’ योजना का पायलट शुरू

त्रिपुरा में महिलाओं के लिए ‘नारी अदालत’ योजना का पायलट शुरू

त्रिपुरा सरकार ने महिलाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र सरकार की ‘नारी अदालत’ योजना को पायलट परियोजना के रूप में लागू करने की मंजूरी दे दी है। राज्य मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार यह योजना राज्य के सभी आठ जिलों के 10 चयनित ग्राम पंचायतों में शुरू की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों के समाधान के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी तंत्र विकसित करना और उन्हें समय पर न्याय दिलाना है।

महिलाओं के लिए ग्राम स्तर पर न्याय व्यवस्था

नारी अदालत योजना को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है। यह पंचायत स्तर पर कार्य करने वाला एक मध्यस्थता मंच है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और अन्य सामाजिक अन्याय से जुड़े मामलों का समाधान समुदाय के भीतर ही करना है।

इस मॉडल में प्रारंभिक हस्तक्षेप और परामर्श को प्राथमिकता दी जाती है। यदि किसी मामले में कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता होती है, तो पुलिस की सहायता से तुरंत कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाती है। गांव स्तर पर इस मंच की स्थापना से महिलाओं के लिए न्याय प्रक्रिया अधिक सुलभ और कम भयावह बनने की उम्मीद है।

नारी अदालत की संरचना और कार्यप्रणाली

प्रत्येक नारी अदालत में अधिकतम नौ सदस्य होंगे, जिन्हें समाज में उनकी विश्वसनीयता और सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार पर चुना जाएगा। ये सदस्य महिलाओं को परामर्श, मध्यस्थता और आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे।

ग्राम स्तर की यह अदालत विवाद समाधान और शिकायत निवारण का मंच बनेगी, जहां महिलाएं अपनी समस्याएं साझा कर सकेंगी और सामुदायिक सहयोग से समाधान प्राप्त कर सकेंगी। राज्य सरकार इसे पायलट परियोजना के रूप में लागू कर इसके परिणामों का आकलन करने के बाद पूरे राज्य में विस्तार की योजना बना रही है।

सभी जिलों में पायलट परियोजना

इस योजना के अंतर्गत त्रिपुरा के सभी आठ जिलों के चयनित ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा, जिससे राज्यभर में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय शासन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

यह योजना केवल विवाद समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं और युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाना, आत्मविश्वास विकसित करना और संस्थागत सहायता तक उनकी पहुंच को आसान बनाना भी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नारी अदालत योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की पहल है।
  • यह पंचायत स्तर पर कार्य करने वाली वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली है।
  • योजना का मुख्य फोकस महिलाओं के खिलाफ हिंसा और सामाजिक अन्याय से जुड़े मामलों पर है।
  • सामुदायिक मध्यस्थता औपचारिक न्याय और पुलिस प्रणाली का पूरक तंत्र बनती है।

यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो इसे पूरे त्रिपुरा में लागू किया जा सकता है और अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में अपनाया जा सकता है। पंचायतों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर न्याय प्रणाली को मजबूत करना महिलाओं के लिए न्याय तक पहुंच बढ़ाने में सहायक होगा। यह पहल लैंगिक समानता, विकेंद्रीकृत शासन और सामुदायिक सामाजिक सुधार को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय नीति के अनुरूप है।

Originally written on March 4, 2026 and last modified on March 4, 2026.

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