तेलंगाना में प्राचीन पेट्रोग्लिफ्स की खोज से इतिहास के नए संकेत

तेलंगाना में प्राचीन पेट्रोग्लिफ्स की खोज से इतिहास के नए संकेत

तेलंगाना के मंचिरेवुला क्षेत्र में बीरप्पा मंदिर के पास एक शैलाश्रय में हाल ही में दो प्राचीन पेट्रोग्लिफ्स की खोज की गई है। यह खोज भारत की प्रागैतिहासिक धरोहर को और समृद्ध बनाती है तथा प्रारंभिक मानव जीवन, अभिव्यक्ति और संचार प्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इन शैलचित्रों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि हजारों वर्ष पहले भी मानव समुदाय अपनी सोच और अनुभवों को स्थायी रूप से दर्ज करने के प्रयास करते थे।

पेट्रोग्लिफ्स क्या हैं

पेट्रोग्लिफ्स वे चित्र या प्रतीक होते हैं, जिन्हें चट्टानों की सतह को काटकर या खुरचकर बनाया जाता है। यह चित्रकारी की तरह रंगों से नहीं, बल्कि पत्थर की ऊपरी परत को हटाकर तैयार किए जाते हैं। “पेट्रोग्लिफ” शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों—“पेट्रोस” (पत्थर) और “ग्लाइफीन” (नक्काशी करना)—से मिलकर बना है। ये चित्र कभी हल्की खरोंच के रूप में तो कभी गहरे निशानों के रूप में दिखाई देते हैं, जो समय के साथ भी सुरक्षित रहते हैं।

निर्माण की तकनीकें

प्राचीन मानव ने पेट्रोग्लिफ्स बनाने के लिए कई तकनीकों का उपयोग किया, जैसे पेकिन्ग (ठोककर बनाना), इन्साइजिंग (रेखाएं काटना), अब्रेडिंग (घिसकर बनाना), ड्रिलिंग, पॉलिशिंग और स्क्रैचिंग। इन तकनीकों के लिए मजबूत औजारों और कौशल की आवश्यकता होती थी, जिससे यह पता चलता है कि उस समय के लोग तकनीकी रूप से दक्ष और योजनाबद्ध कार्य करने में सक्षम थे। इन नक्काशियों की मजबूती ही कारण है कि ये हजारों वर्षों तक सुरक्षित रह पाई हैं।

वैश्विक और भारतीय संदर्भ

पेट्रोग्लिफ्स दुनिया के लगभग सभी महाद्वीपों में पाए जाते हैं, केवल अंटार्कटिका को छोड़कर। अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, उत्तर अमेरिका, साइबेरिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई हिस्सों में इनकी बड़ी संख्या देखी गई है। भारत में केरल की एडक्कल गुफाएं पेट्रोग्लिफ्स का एक प्रसिद्ध उदाहरण हैं, जहां प्राचीन मानव द्वारा बनाई गई जटिल आकृतियां आज भी मौजूद हैं। तेलंगाना में हाल की खोज यह दर्शाती है कि भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन कला और अभिव्यक्ति की परंपरा व्यापक रूप से फैली हुई थी।

प्रागैतिहासिक संस्कृति में महत्व

पेट्रोग्लिफ्स मानव इतिहास की सबसे प्रारंभिक कलात्मक अभिव्यक्तियों में से एक माने जाते हैं। ये केवल कला नहीं थे, बल्कि संचार का माध्यम भी थे। इनके माध्यम से लोग अपने विचार, धार्मिक मान्यताएं, क्षेत्रीय सीमाएं और यहां तक कि खगोलीय घटनाओं को भी दर्ज करते थे। कुछ पेट्रोग्लिफ्स को “रॉक गोंग” के रूप में भी उपयोग किया जाता था, जिनसे ध्वनि उत्पन्न होती थी, जो संभवतः धार्मिक या सांस्कृतिक अनुष्ठानों का हिस्सा रही होगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पेट्रोग्लिफ्स चट्टानों पर उकेरी गई नक्काशी होती है, जबकि पेट्रोग्राफ्स रंगों से बनाई गई चित्रकारी होती है।
  • “पेट्रोग्लिफ” शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है पत्थर पर नक्काशी।
  • ये विश्व के सभी महाद्वीपों में पाए जाते हैं, सिवाय अंटार्कटिका के।
  • भारत में केरल की एडक्कल गुफाएं पेट्रोग्लिफ्स के प्रमुख उदाहरण हैं।

इस नई खोज ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत का प्रागैतिहासिक अतीत अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण रहा है। तेलंगाना के ये पेट्रोग्लिफ्स न केवल पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे हमें यह भी बताते हैं कि मानव सभ्यता की जड़ें कितनी गहराई तक फैली हुई हैं।

Originally written on March 17, 2026 and last modified on March 17, 2026.

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