तिरुवनंतपुरम में संदिग्ध समुद्री न्यूरोटॉक्सिन विषाक्तता, टेट्रोडोटॉक्सिन पर जांच केंद्रित
केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के विजिनजम क्षेत्र में समुद्री भोजन के सेवन के बाद कई लोगों के गंभीर रूप से बीमार पड़ने की घटना ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। 16 फरवरी की रात एक ही परिवार के छह सदस्यों में से तीन में गंभीर लक्षण विकसित हुए, जिनमें से दो की कुछ ही घंटों में मृत्यु हो गई। इसके बाद उसी रेस्तरां और तारीख से जुड़े छह अन्य तीव्र बीमारी के मामले सामने आए। प्रारंभिक जांच में सामान्य खाद्य विषाक्तता, जैसे भोजन के खराब होने या बैक्टीरियल संक्रमण, को खारिज कर दिया गया है। अब जांच का केंद्र प्राकृतिक समुद्री विष, विशेषकर टेट्रोडोटॉक्सिन (टीटीएक्स), पर है।
मछली के अंडे (रो) पर संदेह
अधिकारियों ने मछली के अंडों (फिश रो) को संभावित स्रोत के रूप में चिन्हित किया है, क्योंकि सभी प्रभावित व्यक्तियों ने यह व्यंजन खाया था। कुछ समुद्री प्रजातियों में पाए जाने वाले विषाक्त तत्व जैव-संचयन (बायोएक्यूम्यूलेशन) के माध्यम से मछली के अंडों में एकत्रित हो सकते हैं।
मामलों का एक ही स्थान और समय से जुड़ा होना तथा लक्षणों का तेजी से प्रकट होना यह संकेत देता है कि यह माइक्रोबियल संक्रमण की बजाय शक्तिशाली विष का मामला हो सकता है। प्रारंभ में सिगुआटॉक्सिन की संभावना पर भी विचार किया गया था, किंतु वर्तमान मामलों के नैदानिक लक्षण पारंपरिक सिगुआटेरा विषाक्तता से मेल नहीं खाते।
टेट्रोडोटॉक्सिन की ओर संकेत करते लक्षण
चिकित्सकों ने मरीजों में प्रमुख रूप से न्यूरोलॉजिकल लक्षण देखे, जिनमें तीव्र पक्षाघात और गंभीर प्रणालीगत जटिलताएं शामिल थीं। भोजन सेवन और स्थिति के बिगड़ने के बीच कम समय अंतराल तथा कुछ घंटों में मृत्यु होना टेट्रोडोटॉक्सिन विषाक्तता के ज्ञात मामलों से मेल खाता है।
टेट्रोडोटॉक्सिन विश्व के सबसे शक्तिशाली समुद्री न्यूरोटॉक्सिनों में से एक है। यह तंत्रिका कोशिकाओं के सोडियम चैनलों को अवरुद्ध कर देता है, जिससे मांसपेशियों में लकवा और श्वसन विफलता हो सकती है। यह विष ऊष्मा-स्थिर होता है, अर्थात पकाने से नष्ट नहीं होता।
फॉरेंसिक जांच और स्रोत की पड़ताल
मृतकों से लिए गए आंतरिक नमूनों की रासायनिक जांच जारी है। प्रयोगशाला पुष्टि के बाद ही टेट्रोडोटॉक्सिन को मृत्यु का निश्चित कारण माना जा सकेगा। खाद्य सुरक्षा अधिकारी समुद्री भोजन की आपूर्ति श्रृंखला का भी पता लगा रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि संदूषण मछली पकड़ने के चरण में हुआ या बाद में।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टेट्रोडोटॉक्सिन (टीटीएक्स) एक ऊष्मा-स्थिर समुद्री न्यूरोटॉक्सिन है, जिसका कोई ज्ञात प्रतिविष नहीं है।
- टीटीएक्स सोडियम चैनलों को अवरुद्ध कर पक्षाघात और श्वसन विफलता उत्पन्न कर सकता है।
- सिगुआटॉक्सिन समुद्री डाइनोफ्लैजिलेट्स द्वारा उत्पन्न होता है और रीफ मछलियों में संचित हो सकता है।
- मछली के अंडे पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर समुद्री विषों का जैव-संचयन कर सकते हैं।
यह घटना समुद्री जैव-विषों से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को रेखांकित करती है। समुद्र के बढ़ते तापमान और पारिस्थितिक परिवर्तनों से विषाक्त तत्वों का वितरण प्रभावित हो सकता है। विजिनजम की घटना सख्त समुद्री खाद्य निगरानी और त्वरित विष-विश्लेषण प्रणाली की आवश्यकता को उजागर करती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।