ताइवान पर बयानबाज़ी के बाद चीन ने जापान पर लगाया ड्यूल-यूज़ वस्तुओं का निर्यात प्रतिबंध

ताइवान पर बयानबाज़ी के बाद चीन ने जापान पर लगाया ड्यूल-यूज़ वस्तुओं का निर्यात प्रतिबंध

चीन ने जापान के खिलाफ ड्यूल-यूज़ (दोहरी उपयोग) वस्तुओं के निर्यात पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जिसमें दुर्लभ पृथ्वी खनिजों जैसी रणनीतिक सामग्रियाँ भी शामिल हैं। यह कदम जापान की प्रधानमंत्री साना टाकाइची द्वारा ताइवान पर दिए गए विवादास्पद बयान के बाद उठाया गया है, जिसे बीजिंग ने अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा है।

तत्काल प्रभाव से लागू हुआ निर्यात प्रतिबंध

मंगलवार को जारी एक आधिकारिक वक्तव्य में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि ये प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। हालांकि मंत्रालय ने प्रभावित वस्तुओं की विस्तृत सूची जारी नहीं की, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और अप्रसार (non-proliferation) दायित्वों के अनुरूप लिया गया है।

दुर्लभ पृथ्वी खनिजों और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों पर विशेष ध्यान

मंत्रालय द्वारा साझा किए गए संदर्भ सूची में दुर्लभ पृथ्वी तत्व, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और विमानन पुर्ज़े, ड्रोन और परमाणु तकनीक से जुड़ी वस्तुएँ शामिल हैं। दुर्लभ पृथ्वी खनिज विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनका उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों (जैसे लड़ाकू विमानों) में होता है। जापान इन खनिजों के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है और हाल के वर्षों में इसके दो-तिहाई से अधिक आयात चीन से ही होते आए हैं।

ताइवान पर टिप्पणियों से भड़की राजनयिक टकराव

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री साना टाकाइची द्वारा ताइवान पर दिए गए बयान ने बीजिंग को नाराज़ कर दिया। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का अभिन्न अंग मानता है और इस मुद्दे पर किसी भी विदेशी टिप्पणी पर तीव्र प्रतिक्रिया देता है। बयान के बाद चीन ने जापान के राजदूत को तलब किया और चीनी नागरिकों को जापान यात्रा को लेकर चेतावनी जारी की।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ड्यूल-यूज़ वस्तुएँ वे होती हैं जिनका उपयोग नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
  • चीन वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी खनिज उत्पादन और प्रोसेसिंग में अग्रणी है।
  • “वन चाइना पॉलिसी” के अंतर्गत चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।
  • चीन और जापान के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद गहरे आर्थिक संबंध हैं।

रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से परिणाम

चीन और जापान के बीच ऐतिहासिक विवाद, क्षेत्रीय मतभेद और सुरक्षा नीतियों को लेकर अक्सर तनाव रहता है, हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी अत्यंत गहरी है। चीन ने जापान से रिश्ते सुधारने के लिए “ठोस कार्रवाई” की मांग की है और कहा है कि केवल बयानबाज़ी पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्रतिबंधों का असर जापानी निर्माण आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों देशों के संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।

Originally written on January 7, 2026 and last modified on January 7, 2026.

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