तरनजीत सिंह संधू बने दिल्ली के नए उपराज्यपाल
भारत के वरिष्ठ राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा घोषित राज्यपाल और उपराज्यपाल पदों में व्यापक फेरबदल के तहत की गई है। भारतीय विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी रहे संधू पहले संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं और उन्होंने भारत–अमेरिका रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी नियुक्ति राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।
भारतीय विदेश सेवा में लंबा कूटनीतिक करियर
तरनजीत सिंह संधू भारतीय विदेश सेवा के 1988 बैच के अधिकारी हैं। तीन दशकों से अधिक लंबे कूटनीतिक करियर के दौरान उन्होंने विदेशों में भारत के कई महत्वपूर्ण मिशनों और विदेश मंत्रालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं।
उन्होंने वर्ष 2020 से 2024 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया। इससे पहले वे श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास में उप मिशन प्रमुख के रूप में भी सेवा दी थी। अपने कूटनीतिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारत–अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में भूमिका
वाशिंगटन में अपने कार्यकाल के दौरान संधू भारत–अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से शामिल रहे। इस अवधि में दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा।
उन्होंने रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखला सहयोग और अमेरिका में भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संपर्क को मजबूत करने जैसे कई महत्वपूर्ण पहलों पर काम किया। उनके प्रयासों ने दोनों देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक सहयोग को और गहरा करने में मदद की।
दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी
कूटनीतिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अब तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। उपराज्यपाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं।
इस पद के तहत सार्वजनिक व्यवस्था, भूमि और प्रशासनिक समन्वय जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों की जिम्मेदारी उपराज्यपाल के पास होती है। साथ ही केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने में भी उपराज्यपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
राज्यपालों में व्यापक फेरबदल का महत्व
तरनजीत सिंह संधू की नियुक्ति देश में राज्यपाल और उपराज्यपाल पदों में किए गए व्यापक फेरबदल का हिस्सा है। इस बदलाव के तहत पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में भी नेतृत्व में परिवर्तन किया गया है।
ऐसे फेरबदल समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक पदों के प्रशासनिक संतुलन और शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में संधू राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासन और केंद्र–राज्य समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तरनजीत सिंह संधू भारतीय विदेश सेवा के 1988 बैच के अधिकारी हैं।
- उन्होंने वर्ष 2020 से 2024 तक अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया।
- उपराज्यपाल केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं।
- दिल्ली के उपराज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
तरनजीत सिंह संधू का प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव दिल्ली के शासन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उनकी नियुक्ति से राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासन और केंद्र सरकार के साथ समन्वय को और मजबूत होने की उम्मीद की जा रही है।