तमिलनाडु में वूली-नेक्ड स्टॉर्क की दुर्लभ मौजूदगी

तमिलनाडु में वूली-नेक्ड स्टॉर्क की दुर्लभ मौजूदगी

हाल ही में तमिलनाडु के तंजावुर के धान के खेतों में वूली-नेक्ड स्टॉर्क के दुर्लभ दर्शन दर्ज किए गए हैं, जिसने इस पक्षी प्रजाति की उपस्थिति को लेकर वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का ध्यान आकर्षित किया है। यह घटना इस बात का संकेत है कि आर्द्रभूमि और कृषि आधारित पारिस्थितिक तंत्र आज भी विविध पक्षी प्रजातियों को आश्रय प्रदान कर रहे हैं। इस तरह की दुर्लभ उपस्थिति संरक्षण प्रयासों के महत्व को भी उजागर करती है।

वूली-नेक्ड स्टॉर्क का परिचय

वूली-नेक्ड स्टॉर्क, जिसका वैज्ञानिक नाम सिकोनिया एपिस्कोपस है, एक बड़ा जलचर पक्षी है जो सारस कुल (Ciconiidae) से संबंधित है। इसे व्हाइट-नेक्ड स्टॉर्क या बिशप स्टॉर्क के नाम से भी जाना जाता है। यह पक्षी अपनी विशिष्ट बनावट और पारिस्थितिक भूमिका के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से यह आर्द्रभूमि में एक महत्वपूर्ण शिकारी के रूप में कार्य करता है।

आवास और वितरण

यह प्रजाति अफ्रीका और एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से पाई जाती है, जिसमें भारत से लेकर इंडोनेशिया तक का क्षेत्र शामिल है। भारत में यह मुख्य रूप से उत्तरी हिस्सों में अधिक देखा जाता है, लेकिन तमिलनाडु में हालिया दर्शन इसके विस्तृत वितरण की ओर संकेत करते हैं। यह पक्षी घास के मैदानों, धान के खेतों, आर्द्रभूमियों, नदी किनारों और तालाबों जैसे खुले क्षेत्रों में रहना पसंद करता है, जहां भोजन आसानी से उपलब्ध होता है।

शारीरिक विशेषताएं और व्यवहार

वूली-नेक्ड स्टॉर्क एक बड़े पंखों वाला उड़ने वाला पक्षी है, जो लंबी दूरी तय करने के लिए गर्म हवा की धाराओं यानी थर्मल्स का उपयोग करता है। इसका शरीर मुख्यतः काला होता है, जबकि इसकी गर्दन पर ऊनी सफेद रंग की परत होती है, जो इसे विशिष्ट बनाती है। इसके पंखों में गहरे हरे रंग की चमक दिखाई देती है और पेट का हिस्सा सफेद होता है। युवा पक्षी वयस्कों की तुलना में कम चमकदार होते हैं। यह प्रजाति आमतौर पर अकेले या छोटे समूहों में प्रजनन करती है।

आहार और संरक्षण स्थिति

यह पक्षी मुख्यतः मांसाहारी होता है और मछलियों, उभयचरों, सरीसृपों, कीड़ों तथा जलीय जीवों जैसे केकड़ों और मोलस्क का शिकार करता है। यह धीरे-धीरे पानी या घास में चलते हुए अपने शिकार को पकड़ता है। वर्तमान में इसे अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में ‘निकट संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखा गया है। इसके अस्तित्व के लिए आर्द्रभूमि का क्षरण, आवास की हानि और कृषि पद्धतियों में बदलाव प्रमुख खतरे हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वूली-नेक्ड स्टॉर्क का वैज्ञानिक नाम सिकोनिया एपिस्कोपस है।
  • इसे व्हाइट-नेक्ड स्टॉर्क या बिशप स्टॉर्क भी कहा जाता है।
  • यह IUCN रेड लिस्ट में ‘निकट संकटग्रस्त’ श्रेणी में शामिल है।
  • यह उड़ान के दौरान थर्मल्स का उपयोग करता है।

तंजावुर में इस दुर्लभ पक्षी की उपस्थिति यह दर्शाती है कि यदि आर्द्रभूमियों और कृषि क्षेत्रों का संरक्षण किया जाए, तो वे जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र बने रह सकते हैं। वूली-नेक्ड स्टॉर्क की यह झलक न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रेरक संकेत भी है।

Originally written on April 11, 2026 and last modified on April 11, 2026.

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