तमिलनाडु में महिलाओं के लिए नई उद्यमिता सशक्तिकरण योजना

तमिलनाडु में महिलाओं के लिए नई उद्यमिता सशक्तिकरण योजना

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने राज्य में महिलाओं को व्यवसाय के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से तमिलनाडु महिला उद्यमी सशक्तिकरण योजना शुरू की है। इस योजना को राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा तैयार किया गया है। इसका लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में लगभग एक लाख महिलाओं को उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना की घोषणा राज्य सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई, जहां कई अन्य कल्याणकारी, अवसंरचनात्मक और विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया गया।

महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा

तमिलनाडु महिला उद्यमी सशक्तिकरण योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत इच्छुक महिला उद्यमियों को संस्थागत सहयोग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

राज्य सरकार का मानना है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राज्य की औद्योगिक वृद्धि में भी योगदान देगी।

कई अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन

इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रम कल्याण और कौशल विकास विभाग द्वारा स्थापित निर्माण श्रमिकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए कल्याण केंद्रों का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके अलावा लगभग 27 करोड़ रुपये की लागत से तीन नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने की आधारशिला भी रखी गई।

स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्य भर में लगभग 167 करोड़ रुपये की चिकित्सा अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। साथ ही तमिलनाडु सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन द्वारा 60 हजार मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाले गोदामों के निर्माण की योजना भी शुरू की गई, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 78 करोड़ रुपये है।

शहरी योजना और क्षेत्रीय विकास

मुख्यमंत्री ने भविष्य के शहरी विकास को दिशा देने के लिए तिरुचिरापल्ली मास्टर प्लान 2045 और तूतीकोरिन मास्टर प्लान 2045 भी जारी किए। इसके अलावा मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये की अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया।

राज्य में औद्योगिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 665 करोड़ रुपये की लागत वाली 13 नई विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी गई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य औद्योगिक वृद्धि को बढ़ाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र भारत में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान तकनीकी और औद्योगिक कौशल प्रदान करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण देते हैं।
  • मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र समुद्री तटों की रक्षा करते हैं और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • नीलगिरि तहर एक संकटग्रस्त पर्वतीय खुरदार पशु है जो पश्चिमी घाट क्षेत्र में पाया जाता है।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने कई संरक्षण और सांस्कृतिक परियोजनाओं की भी आधारशिला रखी। इनमें कडलूर जिले के पिचावरम में मैंग्रोव संरक्षण केंद्र, विल्लुपुरम जिले के मरक्कनम में अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षी केंद्र और कोयंबटूर में नीलगिरि तहर संरक्षण केंद्र शामिल हैं। साथ ही एम.जी.आर. फिल्म और टेलीविजन संस्थान में नए शूटिंग फ्लोर का उद्घाटन किया गया और बी.आर. आंबेडकर की 73 रचनाओं का मराठी से तमिल भाषा में अनुवाद भी जारी किया गया। राज्य सरकार के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में लगभग 23.56 लाख भूमि पट्टे वितरित किए गए और 8.66 लाख परिवारों को आवास उपलब्ध कराया गया, जबकि 30 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास कर 7,500 एकड़ से अधिक भूमि नए औद्योगिक इकाइयों के लिए आवंटित की गई।

Originally written on March 7, 2026 and last modified on March 7, 2026.

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