तमिलनाडु में जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम 2025 लागू: खनन प्रभावित समुदायों के लिए निधि उपयोग में सुधार
तमिलनाडु सरकार ने जिला खनिज प्रतिष्ठान (District Mineral Foundation – DMF) नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए DMF नियम, 2025 अधिसूचित किए हैं। ये नए नियम 2017 के पुराने नियमों को प्रतिस्थापित करते हैं और राज्य में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए निधियों के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक निर्णायक कदम हैं।
उल्लंघन पर कड़ी वित्तीय सजा
2025 के संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई खनन पट्टा धारक, संयुक्त अनुज्ञप्ति धारक, पत्थर खनन पट्टा धारक या अन्य स्वीकृतिप्राप्त व्यक्ति DMF निधि में अनिवार्य योगदान नहीं करता है, तो उस पर अब आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
इसमें शामिल है:
- योगदान राशि के बराबर एक बार अतिरिक्त दंड,
- मूल योगदान राशि,
- और 12% वार्षिक ब्याज, जिस अवधि में उल्लंघन हुआ हो।
यह प्रावधान 2017 के नियमों से अलग है, जिनमें 2 वर्ष तक की कैद, ₹5 लाख तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। नए नियम अब आर्थिक प्रतिबंधों पर अधिक ज़ोर देते हैं जिससे तेज़ अनुपालन सुनिश्चित हो सके और DMF में धन का प्रवाह निर्बाध रूप से बना रहे।
2017 नियमों से प्रमुख बदलाव
पूर्ववर्ती नियमों में पहली सजा के बाद ₹50,000 प्रति दिन के अतिरिक्त जुर्माने का भी प्रावधान था।
2025 के नियम:
- कारावास की सजा को समाप्त करते हैं,
- और कानूनी कार्यवाही की जटिलता को कम करते हुए तत्काल वित्तीय कार्रवाई पर ज़ोर देते हैं।
इसका उद्देश्य है कि न्यायिक प्रक्रिया की देरी से बचते हुए निधियों का उपयोग समय पर हो सके।
शासन व्यवस्था और संग्रह प्रक्रिया
DMF ट्रस्ट, उसकी प्रबंध समिति और संचालन परिषद के अध्यक्ष संबंधित जिला कलेक्टर होंगे।
नियमों के अनुसार:
- सभी रॉयल्टी या सेजिनियोरेज शुल्क अब केवल DMF योगदान सहित ही स्वीकार किए जाएंगे।
- DMF में योगदान के बिना रॉयल्टी का भुगतान अमान्य माना जाएगा।
इससे अनुपालन और निगरानी को और मजबूत बनाया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- DMF फंड का उद्देश्य खनन-प्रभावित क्षेत्रों का सतत विकास करना है।
- तमिलनाडु DMF नियम, 2025 ने 2017 नियमों को प्रतिस्थापित किया है।
- न्यूनतम 70% निधि सीधे प्रभावित क्षेत्रों और प्राथमिकताओं पर खर्च करना अनिवार्य है।
- जिला कलेक्टर DMF ट्रस्ट, प्रबंध समिति और संचालन परिषद के अध्यक्ष होंगे।
प्राथमिकता वाले क्षेत्र और एंडोमेंट फंड
नए नियमों के अनुसार:
- कम से कम 70% DMF निधि को सीधे प्रभावित क्षेत्रों और उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च करना अनिवार्य है, जैसे:
- पीने का पानी,
- पर्यावरण संरक्षण,
- स्वास्थ्य सेवा,
- शिक्षा,
- और महिला कल्याण।
- वर्ष में ₹10 करोड़ या उससे अधिक DMF संग्रह करने वाले जिलों के लिए एक एंडोमेंट फंड बनाए रखना अनिवार्य है, जिसकी राशि सालाना संग्रह का 10% तक हो सकती है।
- इसका उपयोग उन क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के लिए किया जाएगा जहाँ खनन बंद हो चुका है या खनिज समाप्त हो चुके हैं।
यह पहल खनन से प्रभावित समुदायों को दीर्घकालिक संरक्षण, सम्मान और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।