तमिलनाडु की छात्रा ने राष्ट्रीय मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर रच दिया इतिहास
तमिलनाडु के रानीपेट की कक्षा IX की छात्रा एस. जी. रोशिनी ने 29वीं ऑल इंडिया नेशनल मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। यह प्रतियोगिता 25 जनवरी को गोवा में आयोजित हुई थी और इस उपलब्धि ने न केवल रोशिनी की प्रतिभा को रेखांकित किया, बल्कि भारत की पारंपरिक युद्ध कलाओं की लोकप्रियता को भी उजागर किया है।
पारंपरिक मार्शल आर्ट्स में राष्ट्रीय स्तर पर सफलता
इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप का उद्देश्य भारत की पारंपरिक युद्ध कलाओं के युवा और प्रतिभाशाली अभ्यासियों की पहचान करना था, जिसमें सिलंबम जैसे प्राचीन कला रूप भी शामिल थे। देशभर से प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा में रोशिनी ने उत्कृष्ट तकनीकी कौशल, अनुशासन और निरंतरता प्रदर्शित कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
प्रारंभिक प्रशिक्षण और प्रतियोगी सफर
रोशिनी ने सिलंबम का प्रशिक्षण नौ वर्ष की उम्र से प्रसिद्ध प्रशिक्षक मुरली के निर्देशन में शुरू किया। बीते वर्षों में उन्होंने तमिलनाडु में कई जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया, जिससे उन्हें प्रतिस्पर्धी अनुभव प्राप्त हुआ। निरंतर अभ्यास और मैदान पर उतरने का आत्मविश्वास उनके राष्ट्रीय स्तर की सफलता का मूल आधार रहा।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विद्यालय की सराहना
रोशिनी रानीपेट स्थित वेदावली विद्यालय, एनपीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा हैं। विद्यालय की संवाददाता विद्या संपत ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता उनकी निष्ठा और अनुशासन का प्रमाण है। उन्होंने यह भी आशा जताई कि रोशिनी का उदाहरण अन्य छात्रों को शिक्षा के साथ खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु प्रेरित करेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 29वीं ऑल इंडिया नेशनल मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप 2026 का आयोजन गोवा में हुआ था।
- इस प्रतियोगिता में सिलंबम जैसी पारंपरिक भारतीय युद्ध कलाओं को बढ़ावा दिया गया।
- सिलंबम एक प्राचीन युद्ध कला है जिसकी उत्पत्ति तमिलनाडु में हुई थी।
- राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताएं भारत में युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
रोशिनी की स्वर्ण पदक जीत को रानीपेट सहित तमिलनाडु में भरपूर सराहना मिली है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक युद्ध कलाएँ न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर रही हैं, बल्कि युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के मंच भी प्रदान कर रही हैं। प्रारंभिक प्रशिक्षण, संस्थानिक सहयोग और प्रतिभा को पहचानने वाली प्रतियोगिताएँ किसी भी युवा खिलाड़ी को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा सकती हैं।
रोशिनी की सफलता आज के युवाओं के लिए यह संदेश है कि परंपरा और आधुनिक प्रतिस्पर्धा साथ-साथ चल सकते हैं—बशर्ते उनमें समर्पण और दृढ़ संकल्प हो।