ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026: विकसित भारत @2047 की ऊर्जा रूपरेखा

ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026: विकसित भारत @2047 की ऊर्जा रूपरेखा

भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने ‘ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (NEP) 2026’ सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी की है। यह नीति वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना — “विकसित भारत @2047” — के अनुरूप बिजली क्षेत्र में समग्र परिवर्तन की दिशा में एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करती है। अंतिम रूप से अधिसूचित होने पर यह नीति 2005 की मौजूदा राष्ट्रीय विद्युत नीति का स्थान लेगी, जो अब बदलते ढांचागत और तकनीकी परिवर्तनों के अनुकूल नहीं रही है।

2005 से अब तक बिजली क्षेत्र में बदलाव

विद्युत मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2005 से भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता चार गुना तक बढ़ चुकी है, जिसमें निजी क्षेत्र की उल्लेखनीय भागीदारी रही है। मार्च 2021 तक सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण प्राप्त किया गया, वर्ष 2013 में एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड स्थापित हुआ, और 2024–25 में प्रति व्यक्ति बिजली खपत लगभग 1,460 किलोवाट-घंटा तक पहुंच गई है।

फिर भी, वितरण क्षेत्र में लगातार समस्याएं बनी हुई हैं, जैसे कि भारी संचयी घाटा, वितरण कंपनियों पर बढ़ता कर्ज, लागत-आधारित न होने वाली दरें, और क्रॉस सब्सिडी की अधिकता।

खपत लक्ष्य और जलवायु प्रतिबद्धताएं

ड्राफ्ट नीति 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 kWh और 2047 तक 4,000 kWh तक पहुंचाने का लक्ष्य प्रस्तावित करती है। यह लक्ष्य भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के साथ मेल खाता है — 2005 के स्तर से उत्सर्जन तीव्रता में 2030 तक 45% की कमी और 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करना।

यह नीति ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन की कोशिश करती है।

विद्युत क्षेत्र में ढांचागत सुधार

नीति में विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) और राज्य लोड डिस्पैच केंद्रों द्वारा अग्रिम संसाधन पर्याप्तता योजना की आवश्यकता पर बल दिया गया है, जिसका समन्वय केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा किया जाएगा।

वित्तीय सुधारों में स्वचालित वार्षिक टैरिफ संशोधन, मांग शुल्क पर अधिक निर्भरता, और विशेष रूप से विनिर्माण, रेलवे और मेट्रो जैसे क्षेत्रों के लिए क्रॉस सब्सिडी में कमी का प्रस्ताव है।

नीति में नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, पीयर-टू-पीयर बिजली व्यापार, और 2030 तक अक्षय एवं पारंपरिक बिजली शेड्यूलिंग में समानता जैसे नवाचारों को भी बल दिया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत जारी की जाती है।
  • ड्राफ्ट NEP 2026, 2005 की नीति का स्थान लेगी।
  • भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।
  • AT&C घाटा का अर्थ है Aggregate Technical and Commercial losses (कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियां)।

उत्पादन मिश्रण, बिजली बाजार और ग्रिड आधुनिकीकरण

नीति के तहत परमाणु ऊर्जा क्षमता को 2047 तक 100 गीगावाट तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है, जिसमें छोटे और मॉड्यूलर रिएक्टर शामिल होंगे। स्टोरेज-आधारित जलविद्युत परियोजनाओं के तेजी से विकास और तापीय संयंत्रों में भंडारण एकीकरण की भी योजना है।

बिजली बाजारों में सुधार, ट्रांसमिशन मूल्य निर्धारण, वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण, ग्रिड साइबर सुरक्षा और SCADA जैसी तकनीकों के स्वदेशीकरण को 2030 तक हासिल करने की रूपरेखा भी नीति में शामिल है।

विद्युत मंत्रालय ने कहा कि यह ड्राफ्ट नीति एक ‘भविष्य के लिए तैयार’, ‘आर्थिक रूप से टिकाऊ’ और ‘पर्यावरण अनुकूल’ ब्लूप्रिंट है, जो सस्ती और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नीति को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।

Originally written on January 25, 2026 and last modified on January 25, 2026.

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