डोकडो/ताकेशिमा द्वीपों पर दक्षिण कोरिया-जापान विवाद फिर गहराया
पूर्वोत्तर एशिया में दक्षिण कोरिया और जापान के बीच लंबे समय से चला आ रहा क्षेत्रीय विवाद एक बार फिर उभर आया है। दक्षिण कोरिया ने जापान द्वारा विवादित द्वीपों के सम्मान में आयोजित “ताकेशिमा डे” समारोह की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अपनी संप्रभुता पर अनुचित दावा बताया है। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव को फिर बढ़ा दिया है।
‘ताकेशिमा डे’ पर दक्षिण कोरिया की आपत्ति
जापान के शिमाने प्रांत द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित “ताकेशिमा डे” समारोह को लेकर सियोल ने औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज कराया। यह दिवस वर्ष 2005 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य जापान के दावे को मजबूत करना बताया जाता है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने इस आयोजन को उकसावे वाली कार्रवाई करार देते हुए जापान से इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की।
सियोल का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर रखने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। दक्षिण कोरिया ने दोहराया कि इन द्वीपों पर जापान का कोई भी दावा स्वीकार्य नहीं है।
विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ये द्वीप जापान में ‘ताकेशिमा’ और दक्षिण कोरिया में ‘डोकडो’ के नाम से जाने जाते हैं। ये दो मुख्य द्वीपों और लगभग 30 छोटी चट्टानों का समूह हैं, जो जापान सागर (पूर्वी सागर) में स्थित हैं। यह विवाद जापान के 1910 से 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप पर औपनिवेशिक शासन से जुड़ा हुआ है।
दक्षिण कोरिया ने वर्ष 1954 से इन द्वीपों पर तटरक्षक बल की तैनाती कर रखी है और वह प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण बनाए हुए है। कोरिया का दावा है कि ऐतिहासिक, भौगोलिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर डोकडो उसका अभिन्न हिस्सा है।
राजनयिक विरोध और संप्रभुता का प्रश्न
हालिया घटनाक्रम में दक्षिण कोरिया ने जापान के एक वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। इसके अलावा जापान के विदेश मंत्री द्वारा संसद में दिए गए वक्तव्य, जिसमें इन द्वीपों पर जापान की संप्रभुता दोहराई गई, ने विवाद को और तीखा कर दिया।
दक्षिण कोरिया लगातार जापान से अपने दावे वापस लेने की मांग करता रहा है, जबकि जापान इसे अपने क्षेत्र का वैध हिस्सा मानता है। इस प्रकार यह मुद्दा दोनों देशों के ऐतिहासिक मतभेदों और राष्ट्रीय अस्मिता से भी जुड़ गया है।
सामरिक और आर्थिक महत्व
डोकडो/ताकेशिमा द्वीप उपजाऊ मत्स्य क्षेत्र में स्थित हैं और माना जाता है कि इनके आसपास प्राकृतिक गैस हाइड्रेट के संभावित भंडार हो सकते हैं। इसके अलावा इन द्वीपों पर नियंत्रण से समुद्री सीमाओं और विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) पर भी प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि यह विवाद केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि सामरिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
पूर्वोत्तर एशिया में समुद्री क्षेत्र से जुड़े विवाद अक्सर संसाधनों और सुरक्षा से जुड़े व्यापक हितों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यह विवाद क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बना हुआ है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डोकडो/ताकेशिमा द्वीप जापान सागर (पूर्वी सागर) में स्थित हैं।
- दक्षिण कोरिया वर्ष 1954 से इन द्वीपों पर तटरक्षक बल की तैनाती कर प्रशासनिक नियंत्रण बनाए हुए है।
- जापान का कोरिया पर औपनिवेशिक शासन 1910 से 1945 तक रहा।
- समुद्री क्षेत्रीय विवाद अक्सर विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े होते हैं।
यह विवाद दर्शाता है कि ऐतिहासिक विरासत और क्षेत्रीय दावे आज भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करते हैं। यद्यपि दक्षिण कोरिया और जापान आर्थिक व सुरक्षा साझेदार हैं, फिर भी ऐसे मुद्दे उनके संबंधों में संवेदनशीलता बनाए रखते हैं। स्थायी समाधान के लिए संवाद, कूटनीतिक संयम और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान आवश्यक है।