डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु को पद्म भूषण: कैंसर चिकित्सा में वैश्विक योगदान का सम्मान
प्रसिद्ध रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु को चिकित्सा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए वर्ष 2026 का पद्म भूषण पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह सम्मान उनके दशकों के नवाचार और वैश्विक स्तर पर कैंसर उपचार को नई दिशा देने के कार्यों की मान्यता है।
पद्म पुरस्कार 2026 और राष्ट्रीय सम्मान
पद्म भूषण भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को स्वीकृति दी, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। ये पुरस्कार सामान्यतः मार्च या अप्रैल में राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में प्रदान किए जाते हैं।
रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में क्रांतिकारी योगदान
डॉ. नोरी ने हाई-डोज़-रेट ब्रैकीथेरेपी के क्षेत्र में अग्रणी कार्य किया है। उन्होंने 1970 के दशक में “रिमोट आफ्टर-लोडिंग ब्रैकीथेरेपी” तकनीक विकसित की, जो कैंसरग्रस्त ऊतकों पर अत्यंत सटीक विकिरण प्रदान करती है और स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम नुकसान पहुंचाती है। इस तकनीक ने गर्भाशय, मूत्र प्रणाली, छाती, सिर और गर्दन के कैंसर के उपचार में क्रांति ला दी।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने अमेरिकी नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट द्वारा प्रायोजित कई क्लीनिकल ट्रायल्स में मुख्य अन्वेषक की भूमिका निभाई, जिससे साक्ष्य-आधारित कैंसर चिकित्सा और उपचार प्रोटोकॉल विकसित हुए।
अंतरराष्ट्रीय मान्यता और पूर्व सम्मान
डॉ. नोरी को उनके कार्यों के लिए विश्वभर में सराहा गया है। उन्हें 2014 में अमेरिका का प्रतिष्ठित “एलिस आइलैंड मेडल ऑफ ऑनर” मिला, जो समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को दिया जाता है। भारत सरकार ने उन्हें 2015 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया था। उन्हें अमेरिका के शीर्ष डॉक्टरों में कई बार नामित किया गया है, विशेषकर महिलाओं से संबंधित कैंसर उपचार के क्षेत्र में।
खबर से जुड़े जीके तथ्य:
- पद्म भूषण भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- पद्म पुरस्कार हर वर्ष गणतंत्र दिवस पर घोषित किए जाते हैं।
- हाई-डोज़-रेट ब्रैकीथेरेपी रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में एक महत्वपूर्ण नवाचार है।
- नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट अमेरिका की प्रमुख संस्था है जो कैंसर अनुसंधान को वित्तीय सहायता देती है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मंटाडा गांव में जन्मे डॉ. नोरी ने कर्नूल मेडिकल कॉलेज से स्नातक और उस्मानिया मेडिकल कॉलेज से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर वैश्विक ऑन्कोलॉजी में नेतृत्व की भूमिका निभाना उनकी अकादमिक नींव और नवाचार की शक्ति का प्रमाण है।
डॉ. नोरी की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि समर्पण, विज्ञान और सेवा भाव से किसी भी क्षेत्र में वैश्विक परिवर्तन संभव है। उनका जीवन चिकित्सा के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।