डेनमार्क में 24 मार्च को संसदीय चुनाव, ग्रीनलैंड विवाद से बदला राजनीतिक विमर्श
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने 24 मार्च को संसदीय चुनाव कराने की घोषणा की है। यह आकस्मिक चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब ग्रीनलैंड को लेकर उभरे भू-राजनीतिक तनाव ने देश की राजनीति को नई दिशा दे दी है। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती रुचि और ग्रीनलैंड संबंधी बयानों के बाद डेनमार्क में संप्रभुता और सुरक्षा का मुद्दा प्रमुख बन गया है। फ्रेडरिक्सन ने स्वयं को डेनिश संप्रभुता की सशक्त रक्षक के रूप में प्रस्तुत करते हुए यूरोपीय साझेदारों को एकजुट करने का प्रयास किया है।
ग्रीनलैंड विवाद बना चुनावी केंद्र
ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क साम्राज्य के भीतर एक स्वायत्त क्षेत्र है, वर्तमान चुनाव अभियान का मुख्य मुद्दा बन गया है। प्रधानमंत्री ने आगामी मतदान को निर्णायक बताते हुए कहा कि डेनमार्क और यूरोप को आने वाले वर्षों में “अपने पैरों पर खड़ा” होना होगा।
उन्होंने अमेरिका के साथ संबंधों की पुनर्परिभाषा और रक्षा निवेश में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। ग्रीनलैंड मुद्दे ने फ्रेडरिक्सन की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी मजबूत किया है, विशेषकर कोविड-19 महामारी के दौरान उनके नेतृत्व और यूक्रेन के समर्थन के संदर्भ में।
गठबंधन सरकार पर दबाव
वर्तमान सरकार 2022 में गठित एक बहुदलीय गठबंधन है, जिसमें सोशल डेमोक्रेट्स, लिबरल पार्टी और मॉडरेट्स शामिल हैं। इसे संकट की स्थिति में बनाया गया था, लेकिन अब यह संसदीय बहुमत खोने के खतरे का सामना कर रही है।
2025 के नगर निकाय चुनावों में सोशल डेमोक्रेट्स को झटका लगा, जिसमें कोपेनहेगन के मेयर पद का नुकसान भी शामिल था। 2022 के आम चुनाव में 28 प्रतिशत मत प्राप्त करने वाली पार्टी का समर्थन 2025 के अंत तक घटकर 17 प्रतिशत तक पहुंच गया था, हालांकि हालिया सर्वेक्षणों में यह लगभग 22 प्रतिशत तक सुधरा है।
घरेलू मुद्दे भी बने अहम
विदेश नीति के साथ-साथ मतदाताओं के लिए महंगाई, खाद्य कीमतें, असमानता, कल्याणकारी सेवाएं और आव्रजन जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। 2023 में रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए ‘ग्रेट प्रेयर डे’ सार्वजनिक अवकाश को समाप्त करने का निर्णय विवादास्पद साबित हुआ, हालांकि रक्षा निवेश में वृद्धि को व्यापक समर्थन मिला।
सरकार ने जनवरी में कुछ विदेशी नागरिकों के लिए निर्वासन नियमों में ढील देने का प्रस्ताव रखा, जिससे यूरोपीय मानवाधिकार ढांचे के साथ संभावित टकराव की चर्चा भी तेज हुई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य के अंतर्गत एक स्वायत्त क्षेत्र है।
- डेनमार्क एक संवैधानिक राजतंत्र है, जिसकी एकसदनीय संसद को ‘फोल्केटिंग’ कहा जाता है।
- आर्कटिक क्षेत्र सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां समुद्री मार्ग और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं।
- डेनमार्क नाटो और यूरोपीय संघ का संस्थापक सदस्य है।
24 मार्च का चुनाव यह तय करेगा कि डेनमार्क के मतदाता राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं या घरेलू नीतियों और आर्थिक प्रदर्शन को। ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते तनाव ने स्पष्ट कर दिया है कि आर्कटिक राजनीति अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक यूरोपीय और वैश्विक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।