डीबीटी के 40वें स्थापना दिवस पर लॉन्च हुआ ‘सुज्विका’ पोर्टल, बायोइकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के 40वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “सुज्विका” नामक एआई-संचालित बायोटेक उत्पाद डेटा पोर्टल का शुभारंभ किया। यह मंच उद्योग निकाय एबीएलई के सहयोग से विकसित किया गया है। नई दिल्ली स्थित सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट में आयोजित समारोह में इस डिजिटल पहल का अनावरण किया गया। वर्ष 1986 में स्थापित डीबीटी की चार दशक की यात्रा को इस अवसर पर रेखांकित किया गया।
‘सुज्विका’ पोर्टल का उद्देश्य और महत्व
‘सुज्विका’ एक ट्रेड स्टैटिस्टिक्स डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जो प्रमाणित जैव प्रौद्योगिकी आयात डेटा को सुव्यवस्थित और सुलभ प्रारूप में प्रस्तुत करता है। यह रसायन जैव उत्पादों, औद्योगिक एंजाइमों तथा अन्य बायोटेक आयातों पर क्षेत्रवार जानकारी उपलब्ध कराता है।
इससे शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत को उच्च-मूल्य और उच्च-आयातित उत्पादों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। यह साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, आयात निर्भरता के विश्लेषण और स्वदेशीकरण को प्राथमिकता देने में सहायक होगा। मंत्री ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करेगी और भारत 2047 तक एक ट्रिलियन डॉलर की बायोइकोनॉमी बनने की दिशा में अग्रसर है।
भारत की बायोइकोनॉमी में तीव्र वृद्धि
भारत की बायोइकोनॉमी 2014 में लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 165.7 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इसी अवधि में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या 100 से कम से बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई है।
भारत वैश्विक स्तर पर प्रमुख वैक्सीन निर्माताओं में शामिल है और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक उभरता हुआ केंद्र बन चुका है। ‘बायोई3 नीति’—जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना है—उच्च प्रदर्शन बायोमैन्युफैक्चरिंग को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डीबीटी, बीआईआरएसी और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार परिषद (ब्रिक) स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न पहलें लागू कर रहे हैं।
उभरते शोध क्षेत्र और नई पहलें
कार्यक्रम में राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क की स्थापना पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें छह विशेषीकृत बायोफाउंड्री और 21 उन्नत जैव-सुविधाएं शामिल हैं। 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 95 बायो-इनक्यूबेटर 1,800 से अधिक नवाचार परियोजनाओं को समर्थन दे रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार पहल के अंतर्गत 2,000 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय कॉल भी घोषित की गई है। जीनोम इंडिया परियोजना के तहत 99 आबादियों के 10,000 व्यक्तियों का अनुक्रमण और गंभीर हीमोफीलिया ए के लिए भारत का पहला मानव जीन थेरेपी परीक्षण महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की स्थापना 1986 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत हुई थी।
- ‘सुज्विका’ एआई-आधारित बायोटेक आयात डेटा इंटेलिजेंस पोर्टल है।
- भारत की बायोइकोनॉमी 2024 में लगभग 165.7 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुकी है।
- बायोई3 नीति का उद्देश्य अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना है।
डीबीटी की यह पहल डिजिटल शासन और वैज्ञानिक एकीकरण को सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। ‘सुज्विका’ जैसे प्लेटफॉर्म आयात निर्भरता कम करने, नवाचार को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे।