डावोस 2026: वैश्विक सहयोग के मंच पर भारत की रणनीतिक उपस्थिति
स्विट्ज़रलैंड के डावोस में आज से विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की वार्षिक बैठक 2026 की शुरुआत हुई, जिसमें वैश्विक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी परिवर्तन और घटते वैश्विक विश्वास के बीच 3,000 से अधिक वैश्विक नेता एकत्र हुए हैं। इस पांच दिवसीय सम्मेलन का विषय “A Spirit of Dialogue” है, जिसका उद्देश्य सरकारों, व्यवसायों और संस्थानों के बीच संवाद और सहयोग को पुनर्जीवित करना है।
डावोस 2026 के प्रमुख विषय
इस वर्ष डावोस सम्मेलन में जिन मुद्दों पर विशेष चर्चा हो रही है, उनमें आर्थिक लचीलापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा संक्रमण, वैश्विक जोखिम और भू-राजनीति शामिल हैं। नीति निर्माता और कॉर्पोरेट नेतृत्व यह विचार कर रहे हैं कि एआई आधारित वृद्धि को रोजगार सृजन, वित्तीय स्थिरता और नैतिक शासन के साथ कैसे संतुलित किया जाए। इसके अतिरिक्त, जलवायु वित्त, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और वैश्विक संस्थाओं में विश्वास बहाली जैसे विषय भी मुख्य एजेंडे में हैं।
भारत के लिए डावोस का महत्व
भारत के लिए डावोस केवल एक वैश्विक मंच नहीं, बल्कि नीति स्थिरता, सुधार प्रक्रिया और वैश्विक पूंजी के प्रति खुलेपन को प्रस्तुत करने का प्रमुख अवसर है। दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अब केवल भविष्य की संभावना नहीं, बल्कि वर्तमान वैश्विक विकास का इंजन बनकर उभरा है। भारत का फोकस दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत होने और निर्माण, डिजिटल अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा में साझेदारी बढ़ाने पर है।
भारत का राजनीतिक नेतृत्व
भारत की उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में चार केंद्रीय मंत्री – अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान, प्रह्लाद जोशी और के. राममोहन नायडू शामिल हैं, जो अवसंरचना, ऊर्जा, विनिर्माण और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। साथ ही, छह मुख्यमंत्री, जिनमें देवेंद्र फडणवीस और एन. चंद्रबाबू नायडू जैसे नेता शामिल हैं, राज्य स्तर पर निवेश के अवसरों को प्रदर्शित कर रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक हर वर्ष डावोस, स्विट्ज़रलैंड में आयोजित होती है।
- WEF 2026 का विषय है – “A Spirit of Dialogue”।
- डावोस मंच वैश्विक सार्वजनिक-निजी सहयोग का एक प्रमुख माध्यम है।
- भारत इस मंच का उपयोग विदेशी निवेश आकर्षित करने और नीतिगत सुधारों को प्रस्तुत करने हेतु करता है।
कॉर्पोरेट भारत और रणनीतिक संदेश
भारत ने इस बार अपने सबसे बड़े कॉर्पोरेट प्रतिनिधिमंडल को भेजा है, जिसमें बैंकिंग, तकनीक, निर्माण, स्टार्टअप और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के 100 से अधिक उद्योगपति शामिल हैं। प्रमुख प्रतिनिधियों में मुकेश अंबानी, एन. चंद्रशेखरन, सुनील भारती मित्तल और नंदन नीलेकणि जैसे दिग्गज शामिल हैं। भारत का संदेश स्पष्ट है – निर्माण क्षमता में वृद्धि, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई में नेतृत्व, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और धैर्यवान वैश्विक पूंजी को आमंत्रण।
निष्कर्ष
डावोस 2026 सम्मेलन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक ऐसे समय में हो रहा है जब साझेदारी और संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। भारत की भागीदारी केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं, बल्कि यह उस बदलते दृष्टिकोण का प्रमाण है, जिसमें भारत वैश्विक नीतियों, तकनीक और व्यापारिक सहयोग में सक्रिय नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। यह मंच भारत को न केवल विश्व मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने, बल्कि निवेश और नीति नवाचार को गति देने का भी अवसर प्रदान करता है।