डब्ल्यूटीओ में भारत का उन्नत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर प्रस्ताव

डब्ल्यूटीओ में भारत का उन्नत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर प्रस्ताव

भारत ने विश्व व्यापार संगठन में एक मसौदा मंत्रीस्तरीय घोषणा प्रस्तावित की है, जिसमें विकसित देशों से विकासशील और अल्प-विकसित देशों को उन्नत प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के लिए मजबूत प्रतिबद्धताओं की मांग की गई है। यह प्रस्ताव डब्ल्यूटीओ की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक से पहले प्रस्तुत किया गया है, जो 26 से 29 मार्च के बीच कैमरून की राजधानी याउंडे में आयोजित होने वाली है। भारत का तर्क है कि तकनीकी अंतराल के कारण विकासशील देशों की वैश्विक व्यापार में प्रतिस्पर्धा क्षमता सीमित हो जाती है और वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से पूर्ण लाभ नहीं उठा पाते।

संरचित तकनीकी हस्तांतरण की मांग

2 मार्च को डब्ल्यूटीओ को भेजे गए अपने संचार में भारत ने उन्नत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए एक संरचित और समयबद्ध ढांचा स्थापित करने का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव में विशेष रूप से पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों पर जोर दिया गया है, जो सतत विकास और जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भारत ने सदस्य देशों से आग्रह किया है कि वे ऐसे तंत्र विकसित करने पर सहमति बनाएं, जिससे विकासशील देशों को उन्नत तकनीकों तक बेहतर पहुंच मिल सके। इसके साथ ही भारत ने डब्ल्यूटीओ के “ट्रेड एंड ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी” कार्य समूह से यह भी कहा है कि वह विकासशील देशों के सामने आने वाली तकनीकी बाधाओं पर केंद्रित चर्चा शुरू करे। इन बाधाओं में तकनीक तक पहुंच, उसे अपनाने और प्रभावी रूप से उपयोग करने में आने वाली समस्याएं शामिल हैं।

डब्ल्यूटीओ की पूर्व प्रतिबद्धताओं का संदर्भ

भारत के इस मसौदे में डब्ल्यूटीओ के पहले के मंत्रीस्तरीय निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें तकनीकी हस्तांतरण के महत्व को स्वीकार किया गया था। इसमें वर्ष 2001 की दोहा मंत्रीस्तरीय घोषणा के पैराग्राफ 37 और वर्ष 2005 की हांगकांग मंत्रीस्तरीय घोषणा के पैराग्राफ 43 का उल्लेख किया गया है। इन दोनों घोषणाओं में विकासशील और अल्प-विकसित देशों को तकनीक के प्रवाह को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया था।

भारत ने डब्ल्यूटीओ के प्रमुख समझौतों में शामिल तकनीकी प्रावधानों की समीक्षा का भी प्रस्ताव रखा है। इनमें बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित समझौता, सेवाओं में व्यापार का सामान्य समझौता, कृषि समझौता, तकनीकी बाधा समझौता और स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता समझौता शामिल हैं। इस समीक्षा का उद्देश्य विकासशील देशों को प्रभावित करने वाले तकनीकी अंतराल और बाधाओं की पहचान करना है।

वैश्विक व्यापार और विकास के लिए महत्व

भारत का यह प्रस्ताव इस बात को उजागर करता है कि आज के वैश्विक आर्थिक ढांचे में उन्नत तकनीकों तक असमान पहुंच एक बड़ी चुनौती बन गई है। सेमीकंडक्टर, डिजिटल बुनियादी ढांचे और हरित प्रौद्योगिकियों जैसी आधुनिक तकनीकों तक पहुंच कई विकासशील देशों के लिए अभी भी सीमित है।

निर्यात नियंत्रण, बौद्धिक संपदा प्रतिबंध, उच्च लागत और सीमित वित्तीय संसाधन जैसी बाधाओं के कारण तकनीक का प्रवाह विकासशील अर्थव्यवस्थाओं तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। भारत का उद्देश्य है कि डब्ल्यूटीओ की आगामी बैठक में तकनीकी हस्तांतरण को वैश्विक व्यापार और विकास के एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में स्थापित किया जाए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विश्व व्यापार संगठन में वर्तमान में 164 सदस्य देश शामिल हैं।
  • डब्ल्यूटीओ की मंत्रीस्तरीय बैठक संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था होती है।
  • दोहा मंत्रीस्तरीय घोषणा वर्ष 2001 में वैश्विक व्यापार में विकास संबंधी मुद्दों को संबोधित करने के लिए अपनाई गई थी।
  • ट्रिप्स समझौता अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बौद्धिक संपदा अधिकारों को नियंत्रित करता है।

भारत का यह प्रस्ताव बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था में तकनीकी समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि इस पर सहमति बनती है, तो इससे विकासशील देशों को उन्नत तकनीकों तक बेहतर पहुंच मिल सकती है और वैश्विक व्यापार में उनकी भागीदारी अधिक प्रभावी हो सकती है।

Originally written on March 6, 2026 and last modified on March 6, 2026.

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