डब्ल्यूएचओ ने नए एनओपीवी2 टीके को दी मंजूरी, पोलियो उन्मूलन को मिली नई गति

डब्ल्यूएचओ ने नए एनओपीवी2 टीके को दी मंजूरी, पोलियो उन्मूलन को मिली नई गति

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एक और नवीन मौखिक पोलियो वैक्सीन टाइप-2 (एनओपीवी2) को प्रीक्वालिफिकेशन प्रदान किया जाना वैश्विक पोलियो उन्मूलन अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस निर्णय के बाद संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां, विशेषकर यूनिसेफ, इस टीके की खरीद और वितरण विश्वभर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों के लिए कर सकेंगी। प्रीक्वालिफिकेशन यह सुनिश्चित करता है कि संबंधित वैक्सीन गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है।

एनओपीवी2 को विशेष रूप से अधिक आनुवंशिक स्थिरता के साथ विकसित किया गया है। पारंपरिक मौखिक पोलियो टीके प्रभावी तो रहे हैं, लेकिन दुर्लभ मामलों में उनमें मौजूद कमजोर वायरस में उत्परिवर्तन होकर वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस (सीवीडीपीवी) के प्रकोप की आशंका रहती थी। नई तकनीक के माध्यम से एनओपीवी2 में इस जोखिम को काफी हद तक कम किया गया है।

यह टीका टाइप-2 पोलियो वायरस को लक्षित करता है, जो हाल के वर्षों में कुछ क्षेत्रों में वैक्सीन-व्युत्पन्न प्रकोप का कारण बना। अधिक आनुवंशिक स्थिरता के कारण यह वायरस के पुनः सक्रिय रूप में बदलने की संभावना को घटाता है, साथ ही संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने की क्षमता भी बनाए रखता है। इस प्रकार यह वैश्विक उन्मूलन के अंतिम चरण में उत्पन्न चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है।

वैश्विक नेतृत्व द्वारा हाल ही में लगभग 1.9 अरब डॉलर की वित्तीय प्रतिबद्धता जताई गई है, जिससे पोलियो उन्मूलन प्रयासों को तेज किया जा सके। इस कार्यक्रम के तहत प्रतिवर्ष लगभग 37 करोड़ बच्चों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रयास आर्थिक चुनौतियों और अन्य स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के बीच भी जारी है।

पिछले कई दशकों में व्यापक टीकाकरण अभियानों के कारण पोलियो को विश्व के अधिकांश हिस्सों से समाप्त किया जा चुका है। फिर भी कुछ सीमित क्षेत्रों में यह वायरस अब भी सक्रिय है। यदि टीकाकरण कवरेज में गिरावट आती है तो पुनः संक्रमण का खतरा बना रह सकता है। इसलिए उच्च टीकाकरण दर बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

पोलियोमायलाइटिस एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो मुख्यतः पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है। यह रोग तंत्रिका तंत्र पर हमला कर स्थायी लकवा पैदा कर सकता है और गंभीर मामलों में मृत्यु का कारण भी बन सकता है।

वैश्विक उन्मूलन प्रयासों में मौखिक पोलियो टीकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, क्योंकि इन्हें देना आसान है और ये आंतों में प्रतिरक्षा विकसित कर वायरस के प्रसार को रोकने में सहायक होते हैं। एनओपीवी2 जैसे नवाचार इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी बना रहे हैं।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रीक्वालिफिकेशन मिलने के बाद संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां वैश्विक उपयोग के लिए वैक्सीन खरीद सकती हैं।
  • एनओपीवी2 विशेष रूप से टाइप-2 पोलियो वायरस को लक्षित करता है।
  • पोलियो मुख्यतः पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है और स्थायी पक्षाघात का कारण बन सकता है।
  • वैश्विक अभियान के तहत हर वर्ष लगभग 37 करोड़ बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है।

नए एनओपीवी2 टीके को मिली मंजूरी पोलियो उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यदि निरंतर वित्तीय सहयोग और व्यापक टीकाकरण अभियान जारी रहते हैं, तो शेष बचे संक्रमण क्षेत्रों को भी समाप्त कर विश्व को पोलियो-मुक्त बनाया जा सकता है। यह उपलब्धि वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय सिद्ध हो सकती है।

Originally written on February 14, 2026 and last modified on February 14, 2026.

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