ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026: स्वच्छता और सर्कुलर अर्थव्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026: स्वच्छता और सर्कुलर अर्थव्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम

भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 को लागू कर दिया है, जिसने 2016 के पुराने नियमों का स्थान लिया है। ये नियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किए गए हैं। नए प्रावधानों का उद्देश्य कचरा प्रबंधन प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और टिकाऊ बनाना है। इसमें सर्कुलर अर्थव्यवस्था, विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी और ‘प्रदूषक भुगतान करे’ जैसे सिद्धांतों को प्रमुखता दी गई है।

स्रोत पर चार श्रेणियों में कचरे का पृथक्करण

नए नियमों के तहत कचरे का चार भागों—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल कचरा—में पृथक्करण अनिवार्य कर दिया गया है। गीले कचरे जैसे भोजन और जैविक अपशिष्ट का स्थानीय स्तर पर कंपोस्टिंग या प्रसंस्करण किया जाएगा। सूखे कचरे, जिसमें प्लास्टिक, कागज और धातु शामिल हैं, को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। वहीं सैनिटरी और खतरनाक घरेलू कचरे के लिए अलग निपटान व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

थोक कचरा उत्पादकों की जवाबदेही

इन नियमों में बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों, आवासीय परिसरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। इन्हें संभव होने पर अपने परिसर में ही कचरे का प्रसंस्करण करना होगा। इसके साथ ही “विस्तारित थोक कचरा उत्पादक जिम्मेदारी” तंत्र लागू किया गया है, जिससे कचरा प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

डिजिटल निगरानी और बेहतर प्रशासन

कचरा प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल स्थापित करेगा। यह पोर्टल कचरे के उत्पादन से लेकर अंतिम निपटान तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। इसके माध्यम से पंजीकरण, रिपोर्टिंग और ऑडिटिंग को आसान बनाया जाएगा, जिससे डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

लैंडफिल में कमी और सतत समाधान

नए नियमों में लैंडफिल पर निर्भरता कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। पुराने कचरा स्थलों को बायोमाइनिंग और बायोरिमेडिएशन के माध्यम से निर्धारित समय में साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, उद्योगों में रिफ्यूज-डेराइव्ड फ्यूल (RDF) के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है, जिससे ऊर्जा उत्पादन में कचरे का उपयोग बढ़ेगा। पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, जैसे पर्यटकों पर उपयोग शुल्क और विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन प्रणाली।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 ने 2016 के नियमों को प्रतिस्थापित किया है।
  • कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है।
  • ये नियम ‘सर्कुलर अर्थव्यवस्था’ और ‘प्रदूषक भुगतान करे’ सिद्धांत पर आधारित हैं।
  • CPCB द्वारा एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल स्थापित किया जाएगा।

अंततः, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 भारत में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है। यह न केवल कचरा प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सतत विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा देगा।

Originally written on April 1, 2026 and last modified on April 1, 2026.

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