टी एम कलियानन के सम्मान में सलेम रेलवे जंक्शन या हवाई अड्डे का नाम बदलने की मांग तेज

टी एम कलियानन के सम्मान में सलेम रेलवे जंक्शन या हवाई अड्डे का नाम बदलने की मांग तेज

दिग्गज कांग्रेसी नेता टी एम कलियानन की 105वीं जयंती के अवसर पर तमिलनाडु के नामक्कल में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक नेताओं और कोंगु संगठनों ने केंद्र सरकार से सलेम रेलवे जंक्शन या सलेम हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखने की मांग की। इस अवसर पर उनके लंबे, निष्कलंक और लोकतंत्र को समर्पित सार्वजनिक जीवन को याद किया गया।

नामक्कल में मनाई गई जयंती

कांग्रेस पार्टी और क्षेत्रीय संगठनों के नेताओं ने नामक्कल में टी एम कलियानन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने उन्हें नैतिक मूल्यों वाले राजनेता के रूप में याद किया जिन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ईमानदारी और अनुशासन के साथ सार्वजनिक जीवन जिया। यह आयोजन स्वतंत्र भारत की प्रारंभिक संसदीय यात्रा में उनके योगदान को रेखांकित करने का अवसर बना।

टी एम कलियानन की राजनीतिक विरासत

टी एम कलियानन भारत की अस्थायी संसद के सदस्य रहे, जो 1950 से 1952 तक अस्तित्व में रही। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा और विधान परिषद में जनता का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें सार्वजनिक जीवन में साफ-सुथरी राजनीति और जवाबदेही की मिसाल माना जाता है। वक्ताओं ने कहा कि उनका करियर अनुशासित और जिम्मेदार जनसेवा का आदर्श प्रस्तुत करता है।

सार्वजनिक स्थलों के नामकरण की मांग

नामक्कल से सांसद वी एस मथेस्वरन ने कहा कि कलियानन की स्मृति में किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल का नामकरण एक उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि सलेम रेलवे जंक्शन या हवाई अड्डे का नाम बदलना, एक ऐसे नेता को सम्मान देने जैसा होगा जिसकी छवि आज तक निष्कलंक बनी रही है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे इस मांग को संविधान सभा में औपचारिक रूप से उठाएंगे

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अस्थायी संसद (Provisional Parliament) भारत में 1950 से 1952 तक कार्यरत रही, जब तक पहली आम चुनावों के बाद स्थायी संसद नहीं बनी।
  • रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे का नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक होती है।
  • तमिलनाडु में सार्वजनिक संस्थानों का नामकरण प्रमुख नेताओं के नाम पर करने की ऐतिहासिक परंपरा रही है।
  • सलेम, तमिलनाडु के पश्चिमी भाग का एक प्रमुख परिवहन केंद्र है।

राजनीतिक समर्थन और आगामी प्रक्रिया

तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता डॉ पी वी सेंथिल समेत कई नेताओं ने इस मांग का समर्थन किया और कहा कि संस्थागत नामकरण के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों को संरक्षित किया जा सकता है। अब यह प्रस्ताव संसद में चर्चा और फिर नागरिक उड्डयन और रेल मंत्रालयों द्वारा विचार के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।

यह मांग न केवल एक ईमानदार नेता को सम्मान देने की पहल है, बल्कि यह लोकतांत्रिक आदर्शों को जीवित रखने की दिशा में भी एक सार्थक कदम हो सकता है।

Originally written on January 11, 2026 and last modified on January 11, 2026.

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