ज्ञान भारतम्: भारत की पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने की राष्ट्रीय पहल
केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित ज्ञान भारतम् एक प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करना और उसे पुनर्जीवित करना है। यह पहल संस्कृति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है और ‘विकसित भारत 2047’ की दृष्टि से जुड़ी हुई है, जिसमें सांस्कृतिक संरक्षण को ज्ञान निर्माण और मानव पूंजी विकास से जोड़ा गया है।
पहल का वित्त पोषण और उद्देश्य
कार्यक्रम को समर्थन देने हेतु स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने वर्ष 2025 से 2031 तक के लिए ₹491.66 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है। ज्ञान भारतम् का उद्देश्य प्राचीन पांडुलिपियों को खोजकर, सुरक्षित रखकर और संरक्षित कर उन्हें समकालीन शोध और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रासंगिक बनाना है। यह पहल पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण हेतु संस्थागत ढांचा प्रदान करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
ज्ञान भारतम् के पाँच मुख्य स्तंभ
यह कार्यक्रम पाँच प्रमुख कार्यक्षेत्रों में संचालित होता है:
- सर्वेक्षण और सूचीबद्धता
- संरक्षण और क्षमता निर्माण
- प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण
- भाषाविज्ञान और अनुवाद
- अनुसंधान, प्रकाशन और जन-संपर्क
इन सभी कार्यों के लिए देशभर में क्लस्टर केंद्रों और स्वतंत्र केंद्रों का एक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। अब तक 45 केंद्र और 20 राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश इस कार्यक्रम के लिए नोडल प्राधिकरण के रूप में नामित किए जा चुके हैं।
डिजिटलीकरण, तकनीकी मानक और गुणवत्ता
ज्ञान भारतम् के अंतर्गत अब तक 7.5 लाख से अधिक पांडुलिपियाँ डिजिटलीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 1.29 लाख पांडुलिपियाँ समर्पित पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इस प्रक्रिया में उच्च-गुणवत्ता युक्त नॉन-डिस्ट्रक्टिव स्कैनिंग, एडवांस्ड इमेज प्रोसेसिंग, सुदृढ़ मेटाडेटा प्रोटोकॉल और LTO-9 टेप व क्लाउड बैकअप आधारित दीर्घकालिक संग्रहण जैसे मानकों का पालन किया गया है।
साथ ही, एक एआई-सक्षम डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है, जिससे शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए इन पांडुलिपियों की पहुँच आसान हो सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ज्ञान भारतम् की घोषणा केंद्रीय बजट 2025–26 में की गई थी।
- यह पहल संस्कृति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
- कार्यक्रम के लिए ₹491.66 करोड़ की राशि 2025–2031 हेतु स्वीकृत की गई है।
- इसके पाँच प्रमुख स्तंभों में डिजिटलीकरण, संरक्षण, अनुवाद शामिल हैं।
संस्थागत ढाँचा और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
इस कार्यक्रम के तहत नेशनल डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक एकीकरण, मेटाडेटा निर्माण, स्कैनर की तैनाती और दीर्घकालिक डेटा सुरक्षा हेतु तकनीकी भागीदारों को जोड़ा गया है। एक संरक्षण मैनुअल और सर्वेक्षण ऐप भी विशेषज्ञों व हितधारकों के साथ साझा किए जा चुके हैं।
संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा संसद में इस कार्यक्रम का विवरण दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार भारत की पांडुलिपि विरासत के संरचित संरक्षण को अत्यधिक प्राथमिकता दे रही है।
यह पहल भारत के ज्ञान-आधारित सांस्कृतिक इतिहास को पुनः जीवंत करने और वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।