जैसलमेर में देश का पहला जैन चादर महोत्सव 2026
राजस्थान के मरु-नगर जैसलमेर में 6 से 8 मार्च 2026 तक देश का पहला जैन चादर महोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन 872 वर्ष पुराने दादा श्री जिनदत्त सूरी महाराज के पवित्र वस्त्रों की पूजा पर केंद्रित रहेगा। ये ऐतिहासिक धरोहरें जैसलमेर स्थित जैन मंदिर के ज्ञान भंडार में संरक्षित हैं। आयोजकों के अनुसार देशभर से 30,000 से अधिक श्रद्धालु, जैन संत और कई वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियां इस महोत्सव में भाग लेंगी।
पवित्र वस्त्रों का ऐतिहासिक महत्व
Jaisalmer जैन ट्रस्ट के अनुसार ये वस्त्र विक्रम संवत 1211 के हैं, जब प्रथम दादा गुरुदेव ने अजमेर में समाधि ली थी। मान्यता है कि उनके पार्थिव शरीर का दाह संस्कार हुआ, लेकिन उनके वस्त्र सुरक्षित रहे।
लगभग 145 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1945 में फैली एक भीषण महामारी के दौरान तत्कालीन महारावल के अनुरोध पर ये वस्त्र गुजरात के पाटन से जैसलमेर लाए गए। तब से इन्हें मंदिर के ज्ञान भंडार में संरक्षित रखा गया है। इन अवशेषों में चादर, चोलपट्टा और मुहपत्ती शामिल हैं, जो Khartar Gachchh परंपरा में अत्यंत श्रद्धेय माने जाते हैं।
धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति
महोत्सव का आयोजन खर्तरगच्छाधिपति आचार्य जिन मणिप्रभ सूरीश्वर महाराज के सान्निध्य में होगा। वरिष्ठ जैन संतों की उपस्थिति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat 6 मार्च को कार्यक्रम में शामिल होंगे।
7 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति संभावित है। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद्र कटारिया के भी शामिल होने की संभावना है। यह व्यापक भागीदारी आयोजन के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है।
तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम
महोत्सव का शुभारंभ गुरु भगवंतों की मंगल प्रवेश यात्रा, उद्घाटन अनुष्ठान और संध्या आरती से होगा। दूसरे दिन भव्य वरघोड़ा शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें 872 वर्ष पुरानी चादर को नगर भ्रमण के लिए ले जाया जाएगा, ताकि श्रद्धालु दर्शन कर सकें। इस शोभायात्रा में हाथी, घोड़े, पालकी, झांकियां और सैकड़ों साधु-साध्वियां शामिल होंगे।
दादा गुरुदेव के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति भी आयोजित की जाएगी। समापन दिवस पर आचार्य और गणिनी पदों का अलंकरण तथा पवित्र सामग्री का वितरण किया जाएगा। महोत्सव से पूर्व एक मुमुक्षु की दीक्षा समारोह भी संपन्न होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* खर्तर गच्छ श्वेतांबर जैन परंपरा का एक प्रमुख संप्रदाय है।
* विक्रम संवत ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 57 वर्ष आगे चलता है।
* ज्ञान भंडार जैन परंपरा की पांडुलिपि और धरोहरों को संरक्षित करने वाली पारंपरिक पुस्तकालय व्यवस्था है।
* जैसलमेर अपने पीले बलुआ पत्थर से निर्मित मध्यकालीन जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।
आयोजकों ने ऑनलाइन पंजीकरण और आवास व्यवस्था सहित व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह महोत्सव हाल के वर्षों में जैन समुदाय के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है, जो भक्ति, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक सहभागिता का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करेगा।