जेएनसीएएसआर की खोज: ठोस पदार्थों में ऊष्मा परिवहन की नई तरंग-आधारित समझ

जेएनसीएएसआर की खोज: ठोस पदार्थों में ऊष्मा परिवहन की नई तरंग-आधारित समझ

बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने ठोस पदार्थों में ऊष्मा संचरण के संबंध में एक महत्वपूर्ण खोज की है, जिसने पारंपरिक सिद्धांतों को चुनौती दी है। शोधकर्ताओं ने एक क्रिस्टलीय पदार्थ में फॉनॉन के व्यवहार में कण से तरंग में परिवर्तन (पार्टिकल-टू-वेव क्रॉसओवर) की दुर्लभ प्रक्रिया का पता लगाया है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और अगली पीढ़ी की थर्मोइलेक्ट्रिक तथा ऊष्मा प्रबंधन तकनीकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सामान्यतः ठोस पदार्थों में ऊष्मा का संचरण फॉनॉन नामक क्वांटम कंपन कणों के माध्यम से होता है, जो क्रिस्टल जालिका में कण-सदृश व्यवहार करते हुए बिखरते हैं। इस पारंपरिक “फॉनॉन गैस मॉडल” ने दशकों से पदार्थ विज्ञान की दिशा तय की है। किंतु नई खोज से संकेत मिलता है कि विशेष परिस्थितियों में फॉनॉन तरंग-सदृश सामंजस्य (कोहेरेंस) के माध्यम से ऊष्मा का परिवहन कर सकते हैं।

शोध दल ने टीएल₂एजीआई₃ नामक एक शून्य-आयामी अकार्बनिक धातु हैलाइड का अध्ययन किया, जिसकी संरचना त्रि-आयामी जालिका के बजाय समूह-सदृश इकाइयों से बनी है। इस पदार्थ की जालकीय ऊष्मा चालकता अत्यंत कम, लगभग 0.18 वॉट प्रति मीटर-केल्विन पाई गई।

पारंपरिक सिद्धांत के अनुसार तापमान बढ़ने पर ऊष्मा चालकता में निरंतर कमी आनी चाहिए, लेकिन इस पदार्थ में 125 केल्विन के बाद चालकता लगभग तापमान-स्वतंत्र हो जाती है। लगभग 175 केल्विन पर तरंग-सदृश फॉनॉन परिवहन कण-आधारित बिखराव पर हावी हो जाता है, जिससे पारंपरिक मॉडल की सीमाएं स्पष्ट हो जाती हैं।

यह खोज पॉलिंग के तृतीय नियम से प्रेरित है, जो परमाणु व्यवस्था और संरचनात्मक स्थिरता के बीच संबंध को स्पष्ट करता है। घनीभूत समन्वय इकाइयों में धनायन-धनायन प्रतिकर्षण स्थानीय संरचनात्मक विकृतियां उत्पन्न करता है।

इन विकृतियों के कारण जालिका में अत्यधिक अनहार्मोनिसिटी उत्पन्न होती है, जिससे फॉनॉन का औसत मुक्त पथ बहुत कम हो जाता है। जब बिखराव अत्यधिक बढ़ जाता है, तब ऊष्मा परिवहन तरंग-सदृश सामंजस्य और स्थानीय कंपन अवस्थाओं के बीच टनलिंग द्वारा नियंत्रित होने लगता है।

यह अध्ययन प्रोफेसर कनीष्क बिस्वास के नेतृत्व में किया गया। शोधकर्ताओं ने सिंक्रोट्रॉन एक्स-रे विश्लेषण, रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी, निम्न तापमान ऊष्मा परिवहन मापन और प्रथम सिद्धांत गणनाओं का संयोजन किया।

रेखीयकृत विग्नर परिवहन समीकरण का उपयोग कर कण-सदृश और तरंग-सदृश योगदानों के बीच अंतर स्पष्ट किया गया। विश्लेषण से पुष्टि हुई कि उच्च तापमान पर कोहेरेंस-प्रेरित ऊष्मा परिवहन प्रमुख भूमिका निभाता है।

  • टीएल₂एजीआई₃ एक शून्य-आयामी अकार्बनिक धातु हैलाइड है, जिसकी ऊष्मा चालकता लगभग 0.18 वॉट प्रति मीटर-केल्विन है।
  • ठोस पदार्थों में फॉनॉन सामान्यतः “फॉनॉन गैस मॉडल” का अनुसरण करते हैं।
  • पॉलिंग का तृतीय नियम धनायन-धनायन प्रतिकर्षण और क्रिस्टल स्थिरता से संबंधित है।
  • रेखीयकृत विग्नर परिवहन समीकरण तरंग-सदृश ऊष्मा परिवहन के विश्लेषण में सहायक है।

यह खोज दर्शाती है कि टीएल₂एजीआई₃ एक साथ क्रिस्टल और कांच जैसे गुण प्रदर्शित करता है—दीर्घ-दूरी क्रम को बनाए रखते हुए कांच-सदृश ऊष्मा परिवहन करता है। स्थानीय जालिका अस्थिरता को अभिकल्पित कर फॉनॉन स्थानीयकरण और सामंजस्य उत्पन्न करने की नई रणनीति भविष्य के उन्नत थर्मोइलेक्ट्रिक पदार्थों और कुशल ऊष्मा प्रबंधन प्रणालियों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। यह उपलब्धि मूलभूत पदार्थ अनुसंधान में भारत के बढ़ते योगदान को भी रेखांकित करती है।

Originally written on February 14, 2026 and last modified on February 14, 2026.

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