जी7 शिखर सम्मेलन 2026 में पीएम मोदी की भागीदारी: वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका

जी7 शिखर सम्मेलन 2026 में पीएम मोदी की भागीदारी: वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 17 जून तक फ्रांस में आयोजित होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं। यह भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। भारत भले ही जी7 का सदस्य न हो, लेकिन एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उसकी उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी बढ़ती भूमिका को मजबूत करती है।

कूटनीतिक संवाद और आमंत्रण की पुष्टि

इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की भागीदारी की पुष्टि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान हुई। यह बैठक फ्रांस के ऐतिहासिक स्थल अब्बाये दे वॉक्स-दे-सेर्ने में आयोजित हुई, जिसने भारत-फ्रांस के मजबूत रणनीतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया। फ्रांस के एवियन शहर में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक नेताओं को एक मंच पर लाएगा।

वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर फोकस

इस सम्मेलन में भारत की भूमिका वैश्विक आर्थिक संतुलन और सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगी। संभावित चर्चाओं में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, महंगाई नियंत्रण और सतत आर्थिक विकास जैसे मुद्दे शामिल होंगे। भारत अपने समावेशी विकास मॉडल और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अनुभव को साझा कर वैश्विक विमर्श में योगदान देगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा

पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, इस सम्मेलन का एक अहम विषय होगी। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत और फ्रांस दोनों ने इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जी7 समूह में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल हैं।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
  • भारत जी7 का सदस्य नहीं है, लेकिन विशेष आमंत्रित देश के रूप में भाग लेता है।
  • फ्रांस 2026 में एवियन शहर में जी7 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका

जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी उसकी बढ़ती वैश्विक प्रभावशीलता और कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह सम्मेलन आर्थिक मजबूती, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

Originally written on March 27, 2026 and last modified on March 27, 2026.

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